देहरादून | 15 मई 2026
उत्तराखंड में वर्षवार भर्ती की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे नर्सिंग बेरोजगारों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नर्सिंग एकता मंच से जुड़े अभ्यर्थियों ने स्पष्ट कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के अधिकारों और न्याय की लड़ाई है। मंच ने आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों को भी निराधार बताते हुए सरकार पर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि पिछले करीब 160 दिनों से नर्सिंग अभ्यर्थी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान धरना-प्रदर्शन, कैंडल मार्च, सचिवालय घेराव और मुख्यमंत्री आवास घेराव जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
नवल पुंडीर ने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार का कोई भी प्रतिनिधि आंदोलनकारियों का हाल जानने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार अनदेखी किए जाने के बावजूद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की, लेकिन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
मंच ने आंदोलन के बाद कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत चार नर्सिंग अभ्यर्थियों पर दर्ज मुकदमों को भी गलत करार दिया। मंच के सदस्यों का कहना है कि जिन लोगों ने बेरोजगार युवाओं की आवाज उठाई, उनके खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि इन मुकदमों में कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास प्रतीत होता है।
नर्सिंग एकता मंच के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि किसी संघर्षरत और पीड़ित युवाओं के साथ खड़ा होना राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारी है। उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया जो आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। मंच का कहना है कि यदि बेरोजगारों की आवाज उठाना राजनीति कहलाता है, तो ऐसी राजनीति हर जनप्रतिनिधि को करनी चाहिए ताकि आम जनता को लाभ मिल सके।
मंच से जुड़े सदस्यों ने कहा कि नर्सिंग एकता मंच एक सामाजिक संगठन है और यहां किसी दल विशेष की राजनीति नहीं होती। उन्होंने कहा कि आंदोलन के समर्थन में जो भी व्यक्ति, संगठन या जनप्रतिनिधि आगे आएगा, उसका सम्मान किया जाएगा, चाहे वह किसी भी विचारधारा या राजनीतिक दल से जुड़ा हो।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि आंदोलन को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक वर्ग का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के हजारों नर्सिंग अभ्यर्थियों और बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। आंदोलन में उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों के युवा शामिल हैं और वे लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में नर्सिंग बेरोजगारों का आंदोलन अब केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के अधिकार, रोजगार और सरकारी संवेदनशीलता का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। लगातार जारी आंदोलन और सरकार की चुप्पी के बीच अभ्यर्थियों ने साफ संकेत दिए हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


