स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 16 अप्रैल 2026
उत्तराखंड में उपनल कर्मियों की भर्ती और भविष्य को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी नए आदेश ने प्रशासनिक प्रक्रिया को बदलते हुए सभी विभागों के लिए नई शर्तें तय कर दी हैं।
क्या है नया आदेश?
कार्मिक विभाग के निर्देश के अनुसार, जिन पदों पर उपनल कर्मी कार्यरत हैं और जिन्हें सीधी भर्ती से भरा जाना है, उन पर अब सीधे अधियाचन नहीं भेजा जा सकेगा।
अब प्रत्येक विभाग को अधियाचन भेजने से पहले कार्मिक, वित्त और न्याय विभाग से अनिवार्य अनुमति लेनी होगी। यानी भर्ती प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक सख्त और बहुस्तरीय हो गई है।
क्यों अहम है यह फैसला?
प्रदेश के कई विभागों में बड़ी संख्या में उपनल कर्मी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं। ये नियुक्तियां उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (UPNL) के माध्यम से होती हैं, लेकिन जिन पदों पर ये तैनात हैं, वे स्थायी प्रकृति के माने जाते हैं।
नियमों के मुताबिक, इन पदों को नियमित भर्ती के जरिए भरा जाना चाहिए। ऐसे में यह आदेश सीधे तौर पर हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट के फैसले से जुड़ा है मामला
साल 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मियों के पक्ष में फैसला देते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण पर जोर दिया था।
हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिससे मामला लंबे समय तक उलझा रहा।
सरकार की मंशा क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार इस आदेश के जरिए भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचना चाहती है। चूंकि मामला पहले से न्यायालय में रहा है, इसलिए बिना पूरी जांच के भर्ती प्रक्रिया शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।
अब हर विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी भर्ती प्रक्रिया किसी न्यायिक आदेश या वित्तीय नियमों का उल्लंघन न करे।
कर्मचारियों के बीच अलग-अलग मायने
उपनल कर्मियों के बीच इस आदेश को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
कुछ कर्मचारी इसे अपने लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। उनका मानना है कि अगर सीधी भर्ती प्रक्रिया धीमी होती है, तो मौजूदा कर्मचारियों के नियमित होने की संभावना बढ़ सकती है।
वहीं कर्मचारी नेता विनोद कवि का कहना है कि सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाना चाहिए।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से इस आदेश को सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। कैबिनेट मंत्री खजान दास के अनुसार, यह फैसला कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा न आए।
निष्कर्ष
उपनल भर्ती को लेकर जारी यह नया आदेश प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, इससे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है। आने वाले समय में सरकार की स्पष्ट नीति ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।


