देहरादून | 29 जून 2026
उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सोमवार को राजधानी देहरादून में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 52 गढ़ों में शामिल क्वीली गड़ और जौराशी गड़ से जुड़े धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के संरक्षण और विकास को लेकर राज दरबार ट्रस्ट टिहरी गढ़वाल तथा सजवाण वंश हितकारिणी कमेटी, उत्तराखंड के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक में दोनों गढ़ों में स्थित प्राचीन मंदिरों की पूजा-पद्धति, ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजना पर गंभीर चर्चा की गई।
यह बैठक राज दरबार ट्रस्ट टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार के चन्द्रलोक कॉलोनी, राजपुर रोड स्थित आवास पर आयोजित हुई। बैठक में सजवाण वंश हितकारिणी कमेटी, उत्तराखंड के संरक्षक डॉ. जगमोहन सिंह सजवाण के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल ने क्वीली गड़ और जौराशी गड़ की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ट्रस्ट का सहयोग मांगा।
बैठक के दौरान ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार ने बताया कि क्वीली गड़ और जौराशी गड़ में स्थापित प्राचीन मंदिरों की पूजा-पद्धति तथा वहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की परंपरा लंबे समय से राज परिवार के संरक्षण में रही है। उन्होंने इन गढ़ों के ऐतिहासिक महत्व और उनसे जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं।
बैठक में ठाकुर भगत सजवाण की प्रतिमा स्थापना के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वर्ष 2025 में घंटाकर्ण महोत्सव के दौरान गजा क्षेत्र में मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। इस संबंध में शासनादेश भी जारी हो चुका है और अब आगामी कार्यों को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया कि क्वीली गड़ और जौराशी गड़ के प्रामाणिक इतिहास को संकलित करने के लिए व्यापक स्तर पर शोध कार्य किया जाएगा। इसके लिए इतिहासकारों, लोक गायकों के पारंपरिक गीतों, उपलब्ध अभिलेखों, ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा क्षेत्र के वरिष्ठ एवं जानकार लोगों से संपर्क कर तथ्य जुटाए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर का प्रमाणिक दस्तावेज तैयार किया जा सके।
बैठक में पट्टी क्वीली के कोट गांव के स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में स्थानीय समाज की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी उद्देश्य से ग्रामीणों के सहयोग से भविष्य की योजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में दो वर्ष पूर्व क्वीली गड़ में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया। उस दौरान क्वीली गड़ में ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया था, जिसमें कुल पुरोहित बिजल्वाण और उनियाल सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया था। कार्यक्रम के दौरान गणेश पूजा एवं भूमि पूजन भी संपन्न कराया गया था।
इसके अलावा कोट गांव की पूर्व प्रधान पूनम गोसाईं के नेतृत्व में महिलाओं द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की भी सराहना की गई। बैठक में कहा गया कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए भविष्य में भी स्थानीय स्तर पर ऐसे अभियान जारी रखे जाएंगे।
राज दरबार ट्रस्ट के अध्यक्ष ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार ने क्वीली गड़ और जौराशी गड़ के संरक्षण, मंदिरों के विकास तथा ठाकुर भगत सजवाण की प्रतिमा स्थापना से जुड़े सभी कार्यों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिमा स्थापना के अवसर पर वे स्वयं उपस्थित होकर कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।
बैठक के समापन पर सजवाण वंश हितकारिणी कमेटी, उत्तराखंड की ओर से सुंदर सिंह सजवाण, चित्रपाल सजवाण, भूपेंद्र सिंह सजवाण, जगपाल सिंह सजवाण, दीपेश सजवाण, सुमन सिंह सजवाण, जसपाल सजवाण तथा राहुल सजवाण ने ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
क्वीली गड़ और जौराशी गड़ उत्तराखंड की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। इन स्थलों के संरक्षण, ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण और धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने की दिशा में आयोजित यह बैठक भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय समाज, राज दरबार ट्रस्ट और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इन ऐतिहासिक धरोहरों को नई पहचान मिलने और पर्यटन व सांस्कृतिक संरक्षण को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।


