स्थान: हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखंड)
तारीख: 26 अप्रैल 2026
नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगल में मवेशियों की तलाश में गए एक वन गुर्जर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक का शव जंगल के भीतर बरामद हुआ, जिस पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में भालू के हमले की आशंका जताई जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, तराई पूर्वी वन प्रभाग के किशनपुर रेंज अंतर्गत रैखाल खत्ता निवासी मोहम्मद आरिफ 25 अप्रैल की दोपहर करीब 2 बजे अपने मवेशियों को खोजने के लिए जंगल की ओर गए थे। देर शाम तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिजन चिंतित हो उठे और तत्काल वन विभाग की नजदीकी चौकी को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी घनानंद चनियाल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम, स्थानीय गश्ती दल और परिजनों के साथ मिलकर जंगल में सघन सर्च अभियान शुरू किया गया। घंटों की खोजबीन के बाद रुद्रपुर बीट के प्लॉट संख्या 5 और 9 के बीच स्थित फायर लाइन क्षेत्र में मोहम्मद आरिफ का शव बरामद हुआ।
मौके पर शव की स्थिति बेहद भयावह थी। मृतक के कपड़े फटे हुए थे और शरीर पर गहरे नोंचने व खरोंचने के निशान पाए गए। इन परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रथम दृष्टया इसे भालू के हमले का मामला माना है। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही 26 अप्रैल को प्रभागीय वनाधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी सहित अन्य अधिकारी मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार जल्द ही मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
वन विभाग ने घटना को गंभीरता से लेते हुए इलाके में वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत जंगल में कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, पिंजरे की व्यवस्था की जाएगी और ड्रोन के माध्यम से सर्च ऑपरेशन भी चलाया जाएगा। साथ ही क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है।
एसडीओ अनिल जोशी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला भालू के हमले का प्रतीत हो रहा है, लेकिन विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों और खत्ता निवासियों को सख्त हिदायत दी है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके।
निष्कर्ष:
यह घटना एक बार फिर मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर करती है। जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम राहत देने वाले हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस रणनीति और जागरूकता आवश्यक है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


