दिनांक: 25 अप्रैल 2026 | स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
हरिद्वार जिले में शुक्रवार (24 अप्रैल) को हुआ एक दर्दनाक हादसा पूरे क्षेत्र को झकझोर गया। हैंडपंप के लिए गड्ढा खोदते समय 50 वर्षीय मनोहर सिंह करीब 25 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर मिट्टी में दब गए। करीब 10 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी—डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
समय के साथ टूटती गई उम्मीदें
मनोहर पास के ही गांव के निवासी थे। हादसे की खबर मिलते ही उनका परिवार तुरंत मौके पर पहुंच गया। पत्नी, बच्चे और भाई लगातार इस उम्मीद में बैठे रहे कि मनोहर सुरक्षित बाहर आ जाएंगे, लेकिन हर बीतते घंटे के साथ उम्मीदें कमजोर होती चली गईं।
घटनास्थल पर पसरा मातम और बेबसी
घटनास्थल पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी और दोनों बच्चे लगातार भगवान से दुआ कर रहे थे कि मनोहर सकुशल बाहर निकल आएं। आसपास मौजूद ग्रामीण भी उन्हें सांत्वना देने की कोशिश करते रहे, लेकिन माहौल बेहद भावुक और दर्दनाक था। हर किसी की आंखें नम थीं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में आई कई बाधाएं
शुरुआत में जेसीबी मशीन से खुदाई की गई, लेकिन मिट्टी धंसने के कारण राहत कार्य बार-बार बाधित हुआ। इसके बाद पोकलैंड मशीन की मदद से समानांतर गड्ढा खोदा गया ताकि सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंचा जा सके।
बताया जा रहा है कि खुदाई के दौरान करीब 13 बार मिट्टी की ढांग गिरने से काम रुकता रहा। लगातार प्रयासों के बावजूद समय बीतता गया और स्थिति गंभीर होती चली गई।
अस्पताल पहुंचते ही टूटी अंतिम उम्मीद
करीब 10 घंटे बाद जब मनोहर को बाहर निकाला गया तो तुरंत मेला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई।
30 साल का अनुभव भी नहीं बचा सका जान
मनोहर सिंह एक अनुभवी हैंडपंप मैकेनिक थे। उन्होंने अपने 30 वर्षों के करियर में हजारों हैंडपंप लगाए थे। ग्रामीणों के अनुसार, वे बेहद मेहनती और निडर थे, जो कठिन परिस्थितियों में भी काम करने से पीछे नहीं हटते थे।
कई बार जोखिम उठाने के बावजूद वे सुरक्षित रहे, लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया।
परिवार पर टूटा संकट
मनोहर अपने पीछे पत्नी कुसुम, 10 साल के बेटे और 17 साल की बेटी को छोड़ गए हैं। वे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी पत्नी भी चंडी देवी रोपवे में काम करती हैं, लेकिन अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बच्चों को अभी तक पूरी तरह समझ नहीं आ रहा कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने भी घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
निष्कर्ष
यह हादसा न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ले गया, बल्कि यह भी दिखाता है कि जोखिम भरे कामों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम कितने जरूरी हैं। मनोहर सिंह की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या इस हादसे को रोका जा सकता था?
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासनिक जांच और पीड़ित परिवार को मिलने वाली मदद पर टिकी हैं।




