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तुंगनाथ धाम में श्रद्धालु और घोड़ा-खच्चर संचालक के बीच मारपीट, चोपता में पर्यटकों की हुड़दंगबाजी से बढ़ी चिंता

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड | 06 जून 2026

विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग पर एक तीर्थयात्री और स्थानीय घोड़ा-खच्चर संचालक के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि कहासुनी के बाद तीर्थयात्री ने संचालक के साथ मारपीट कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इसी बीच चोपता क्षेत्र में पर्यटकों की हुड़दंगबाजी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग पर किसी बात को लेकर एक श्रद्धालु और घोड़ा-खच्चर संचालक के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ी और मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना में संचालक के सिर पर गंभीर चोट लगने की सूचना है। स्थानीय लोगों ने घायल व्यक्ति को उपचार के लिए भेजा और मामले की जानकारी प्रशासन को दी।

घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों और व्यापारियों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि यात्रा सीजन के दौरान स्थानीय लोग श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए लगातार सेवाएं देते हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक सौहार्द और धार्मिक वातावरण को प्रभावित करती हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और अतिथि सत्कार के लिए पूरे देश में सम्मानित है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और लोगों का सम्मान करें। लोगों का आरोप है कि कुछ बाहरी पर्यटक और यात्री धार्मिक स्थलों की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं कर रहे हैं, जिससे स्थानीय समाज में असंतोष बढ़ रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश नेगी ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राएं आस्था और श्रद्धा का प्रतीक हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की हिंसा, अभद्रता या कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि प्रदेश की छवि और धार्मिक स्थलों की प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है। लोगों ने देवभूमि की गरिमा और धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इस बीच चोपता क्षेत्र से भी पर्यटकों की हुड़दंगबाजी का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में कुछ युवक वाहनों की छतों पर चढ़कर तेज आवाज में चिल्लाते, शोर-शराबा करते और सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो तुंगनाथ धाम यात्रा मार्ग और चोपता क्षेत्र के आसपास का है।

चोपता, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण “मिनी स्विट्जरलैंड” के नाम से जाना जाता है, वहां इस तरह की घटनाओं से स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि पर्यटन स्थलों पर अनुशासनहीनता से क्षेत्र की छवि खराब होती है और अन्य पर्यटकों को भी असुविधा होती है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने बताया कि तुंगनाथ धाम और चोपता क्षेत्र से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आए हैं। संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

तुंगनाथ धाम में घोड़ा-खच्चर संचालक के साथ हुई मारपीट और चोपता क्षेत्र में पर्यटकों की कथित हुड़दंगबाजी ने यात्रा मार्गों पर अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन और पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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