देहरादून, 21 अप्रैल 2026
आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों और सेविकाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सचिव स्तर पर हुई वार्ता के दौरान आंगनबाड़ी मिनी कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि विभाग ने धरने को कमजोर करने के लिए ऐसे संगठनों को वार्ता में बुलाया, जो धरने में शामिल ही नहीं थे।
कार्यकर्तियों ने स्पष्ट कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र आईसीडीएस (समेकित बाल विकास सेवा) के अंतर्गत संचालित होते हैं, न कि किसी राजनीतिक दल या बाहरी ट्रेड यूनियन के माध्यम से। उन्होंने भारतीय मजदूर संघ, एक्टू, इटक और सीटू जैसे बड़े ट्रेड यूनियनों की बैठक में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि इनका आंगनबाड़ी व्यवस्था से क्या संबंध है।
वार्ता के दौरान सचिव शैलेश बगौली ने जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनीं, तो वे भी स्थिति से हैरान नजर आए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए।
इसके बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपना रुख साफ रखते हुए कहा कि जब तक उनका मानदेय नहीं बढ़ाया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि लंबे समय से वे न्यूनतम मानदेय में काम कर रही हैं, जो उनके जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है।
अधिकारियों ने भी माना कि प्रदेश के करीब 15,000 आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस आंदोलन का असर पड़ा है और कई केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं, जिससे सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
निष्कर्ष:
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यदि सरकार जल्द ही मानदेय बढ़ाने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तो इसका सीधा असर बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।


