देहरादून, उत्तराखंड | सोमवार
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नया जिलाधिकारी मिल गया है। साल 2012 बैच के आईएएस अधिकारी आशीष चौहान ने देहरादून डीएम का कार्यभार संभाल लिया है। शांत स्वभाव, जमीनी कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले आशीष चौहान के पदभार ग्रहण करते ही प्रशासनिक हलकों के साथ आम जनता में भी नई उम्मीदें जाग उठी हैं।
चार्ज संभालते ही उन्होंने साफ संदेश दिया कि उनकी प्राथमिकता केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलें निपटाने की नहीं होगी, बल्कि जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान करना उनकी कार्यशैली का मुख्य हिस्सा रहेगा।
जनता के बीच लोकप्रिय क्यों हैं आशीष चौहान?
आईएएस आशीष चौहान को उत्तराखंड में एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जो प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी आम लोगों से सीधे संवाद बनाए रखते हैं। अपने सहज व्यवहार और गंभीर कार्यशैली के कारण उन्हें प्रशासनिक गलियारों में ‘मिस्टर कूल’ कहा जाता है।
तेज-तर्रार फैसलों के साथ मानवीय दृष्टिकोण उनकी सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है। वे जिस जिले में रहे, वहां लोगों के बीच अपनी अलग छाप छोड़ने में सफल रहे। यही वजह है कि आम जनता उन्हें एक ‘अपना अफसर’ मानती है।
चारधाम यात्रा और ट्रैफिक प्रबंधन रहेगी पहली प्राथमिकता
देहरादून डीएम का कार्यभार संभालने के बाद आशीष चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासन को स्पष्ट प्राथमिकताएं दी गई हैं। इस समय चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और देहरादून जिले के ऋषिकेश व विकासनगर जैसे क्षेत्र यात्रा मार्ग के अहम ट्रांजिट प्वाइंट हैं।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत बनाए रखना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होगी।
साथ ही मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन को लेकर भी विशेष तैयारी की जाएगी। संवेदनशील इलाकों की निगरानी, राहत सामग्री की उपलब्धता और समय पर रिस्पॉन्स को प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल किया गया है।
पेंडेंसी खत्म करने और त्वरित समाधान पर रहेगा फोकस
आशीष चौहान ने साफ कहा कि वे अनावश्यक पेंडेंसी को खत्म करने की दिशा में काम करेंगे। आम लोगों की समस्याओं का उसी स्तर पर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और फाइलों के तेज निस्तारण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
IIT कानपुर से IAS तक का सफर
आशीष चौहान का प्रशासनिक सफर काफी प्रेरणादायक माना जाता है। उन्होंने IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया और उसके बाद UPSC परीक्षा में 89वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने।
कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने समाज और पहाड़ के लिए काम करने का फैसला लिया। तकनीकी समझ होने के बावजूद उन्होंने हमेशा जमीनी प्रशासन को प्राथमिकता दी।
गढ़वाली भाषा में सहज संवाद करने की उनकी शैली भी लोगों को उनसे जोड़ती है। पहाड़ी क्षेत्रों में गांव-गांव जाकर जनता से सीधे मिलना उनकी पहचान का हिस्सा रहा है।
‘जनता दरबार’ नहीं, ‘जनता के द्वार’ की सोच
उत्तरकाशी में जिलाधिकारी रहते हुए आशीष चौहान हर शनिवार किसी न किसी दूरस्थ गांव में चौपाल लगाते थे। ग्रामीणों के बीच बैठकर समस्याएं सुनना और मौके पर अधिकारियों को निर्देश देना उनकी कार्यशैली में शामिल रहा।
ग्रामीण आज भी उन्हें याद करते हुए कहते हैं कि “डीएम साहब खुद गांव तक पहुंचे थे।” यही मानवीय दृष्टिकोण उन्हें बाकी अधिकारियों से अलग बनाता है।
माना जा रहा है कि देहरादून में भी वे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान करने वाली कार्यशैली अपनाएंगे।
सख्त फैसलों के लिए भी मशहूर
आशीष चौहान केवल सौम्य छवि वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले लेने के लिए भी जाने जाते हैं।
पिथौरागढ़ डीएम रहते हुए उन्होंने सुबह छह बजे जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था, जहां 11 डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सभी को निलंबित कर दिया गया।
हरिद्वार में एडीएम रहते हुए कुंभ 2021 के दौरान सामने आए फर्जी कोविड टेस्ट रैकेट के खुलासे में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
आपदा प्रबंधन में भी दिखाई नेतृत्व क्षमता
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। आशीष चौहान ने अपने पिछले कार्यकालों में कई बार ग्राउंड जीरो पर उतरकर नेतृत्व क्षमता दिखाई।
2013 की केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं 2023 के जोशीमठ भू-धंसाव संकट के दौरान लगातार 72 घंटे तक मौके पर डटे रहकर राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी की।
उत्तरकाशी में बादल फटने की आपदा के दौरान भी वे खुद राहत कार्यों में जुटे नजर आए थे।
नवाचार और विकास मॉडल के लिए भी चर्चित
आशीष चौहान प्रशासन में टेक्नोलॉजी और लोकल डेवलपमेंट के संतुलन के लिए भी जाने जाते हैं।
चमोली में उन्होंने ‘हिम प्रहरी ऐप’ लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार से जोड़ना और पलायन रोकना था। पिथौरागढ़ में सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, नेटवर्क और शिक्षा सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में भी उन्होंने काम किया।
आदि कैलाश यात्रा को ऑनलाइन परमिट सिस्टम से जोड़ने से पर्यटन और स्थानीय होम स्टे कारोबार को भी फायदा मिला।
स्पेन में उनके नाम पर रखा गया पहाड़ का नाम
आशीष चौहान की कार्यशैली का प्रभाव केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा। उत्तरकाशी में तैनाती के दौरान एक स्पेनिश पर्वतारोही उनकी कार्यशैली से इतना प्रभावित हुआ कि उसने स्पेन की एक अनाम चोटी का नाम उनके नाम पर रख दिया।
उस शिखर को ‘मजिस्ट्रेट प्वाइंट’ और ट्रेक मार्ग को ‘वाया आशीष’ नाम दिया गया। यह घटना उस समय काफी चर्चाओं में रही थी।
देहरादून को अब क्या उम्मीद?
देहरादून इस समय ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण, जलभराव, बढ़ते शहरी दबाव और जनसुविधाओं जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि आशीष चौहान की फील्ड आधारित कार्यशैली प्रशासन को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बना सकती है।
चारधाम यात्रा, मानसून और राजधानी की जटिल शहरी चुनौतियों के बीच प्रशासन के सामने जिम्मेदारियां कम नहीं हैं, लेकिन आशीष चौहान का अब तक का रिकॉर्ड यह संकेत देता है कि वे केवल बैठकों तक सीमित रहने वाले अधिकारी नहीं हैं।
निष्कर्ष
देहरादून को एक ऐसा जिलाधिकारी मिला है जिसकी पहचान संवेदनशीलता, सख्ती, जमीनी जुड़ाव और आधुनिक प्रशासनिक सोच के संतुलन से बनी है। जनता के बीच जाकर काम करने की उनकी शैली राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव ला सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ‘मिस्टर कूल’ के नाम से मशहूर आशीष चौहान देहरादून की चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और राजधानी को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।


