स्थान: देहरादून (उत्तराखंड) | तारीख: 30 अप्रैल 2026
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में बुधवार देर रात हुई पुलिस मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी अकरम मारा गया। हत्या, लूट और डकैती जैसे 14 संगीन मामलों में वांछित अकरम कोर्ट में पेशी के लिए देहरादून आया था, लेकिन इसी दौरान उसने अपने साथियों के साथ एक नई वारदात को अंजाम दे दिया।
पुलिस के अनुसार, 29 अप्रैल की रात करीब साढ़े दस बजे पौंधा क्षेत्र में ठेकेदार देवराज काम खत्म कर घर लौट रहा था। तभी तीन बदमाशों ने उसे रोककर तमंचे के बल पर दो लाख रुपये से भरा बैग छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर बदमाशों ने देवराज को गोली मार दी, जो उसकी पीठ में लगी। घायल होने के बावजूद देवराज ने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही प्रेमनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल भिजवाया। साथ ही पूरे इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी गई। इसी दौरान पुलिस और बदमाश आमने-सामने आ गए, जिसके बाद दोनों तरफ से करीब 10 राउंड फायरिंग हुई। इस मुठभेड़ में थाना प्रभारी नरेश राठौर को भी गोली लगी, जबकि एक बदमाश ढेर हो गया। दो अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटनास्थल से मिले मोबाइल और तकनीकी जांच के आधार पर मारे गए बदमाश की पहचान उत्तर प्रदेश के शामली निवासी अकरम के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अकरम 2014 के बालावाला अंकित हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। उस वारदात में उसने अपने साथियों के साथ डकैती के दौरान एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी और परिवार के अन्य सदस्यों को बंधक बनाकर लूटपाट की थी।
घटना के बाद अकरम करीब तीन साल तक फरार रहा, जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बाद में 2017 में उसे मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा वह 2024 और 2025 में भी चोरी के मामलों में जेल जा चुका था। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में उसके खिलाफ कुल 14 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। शामली पुलिस ने भी उस पर 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि अकरम कोर्ट में पेशी के लिए देहरादून आया था, लेकिन उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई। मुठभेड़ के दौरान उसके पास से एक देशी पिस्टल, एक तमंचा और लूटा गया पूरा सामान बरामद किया गया।
मुठभेड़ में घायल थाना प्रभारी, बदमाश और पीड़ित देवराज को पहले प्रेमनगर अस्पताल और बाद में हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान अकरम की मौत हो गई। फरार अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हुई हैं।
घायल ठेकेदार देवराज ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मदद मिलने से उसकी जान बच सकी। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
देहरादून में यह मुठभेड़ इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले 3 जुलाई 2009 को रणवीर एनकाउंटर हुआ था, जिसके बाद लंबे समय तक इस तरह की कार्रवाई नहीं देखी गई। ऐसे में 17 साल बाद हुई इस मुठभेड़ ने एक बार फिर पुलिस की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है।
निष्कर्ष:
देहरादून में हुई यह मुठभेड़ न सिर्फ एक कुख्यात अपराधी के अंत की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अपराध के इरादे से आए बदमाशों के खिलाफ पुलिस की तत्परता कितनी अहम है। हालांकि, दो आरोपियों का फरार होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है, लेकिन पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गैंग का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।


