स्थान: कोट ब्लॉक, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) | तारीख: 30 अप्रैल 2026
पौड़ी गढ़वाल जिले के कोट ब्लॉक के घने जंगलों में एक प्राचीन और रहस्यमयी सुरंग (गुफा) मिलने से इतिहास और पुरातत्व जगत में उत्सुकता बढ़ गई है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस सुरंग तक पहुंचने के लिए पुरातत्व विभाग की टीम को कठिन रास्तों का सामना करना पड़ा, जहां प्रारंभिक जांच में इसके मानव निर्मित होने के संकेत मिले हैं।
यह सुरंग गींठीछेड़ा झरने के नीचे स्थित है और जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए करीब एक किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई की टीम ने प्रभारी अधिकारी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर इसका निरीक्षण किया।
जांच के दौरान गुफा के भीतर पत्थरों को काटकर बनाई गई छह सीढ़ियां पाई गईं, जो इसे प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित संरचना होने की ओर इशारा करती हैं। गुफा के अंदर 6 से 8 लोगों के ठहरने लायक पर्याप्त स्थान भी मौजूद है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका उपयोग प्राचीन समय में आश्रय स्थल के रूप में किया जाता रहा होगा।
गुफा का प्रवेश द्वार खड़ी पहाड़ी पर लगभग 20 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिससे वहां तक पहुंचना जोखिम भरा बना हुआ है। इसके अलावा मुख्य गुफा से करीब 200 मीटर की दूरी पर एक अन्य सुरंग का मुहाना भी मिला है। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि दोनों सुरंगें आपस में जुड़ी हो सकती हैं।
हालांकि, सुरंग का रास्ता आगे जाकर मिट्टी और पत्थरों से बंद मिला है, जिसके चलते इसके अंदरूनी हिस्से का पूरा आकलन फिलहाल संभव नहीं हो पाया है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचना भेज दी गई है और जल्द ही विस्तृत सर्वेक्षण की तैयारी की जा रही है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इन सुरंगों का उपयोग प्राचीन काल में सैनिकों द्वारा दुश्मनों से बचने, छिपने या जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए किया जाता रहा होगा। इस खोज ने क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और भी बढ़ा दिया है।
प्रभारी अधिकारी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट के अनुसार, स्थल का प्रारंभिक निरीक्षण पूरा कर लिया गया है और इसकी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत अध्ययन और वैज्ञानिक सर्वेक्षण अभियान जल्द चलाया जाएगा।
निष्कर्ष:
कोट ब्लॉक में मिली यह प्राचीन सुरंग उत्तराखंड के छिपे हुए ऐतिहासिक रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज मानी जा रही है। यदि आगे के अध्ययन में यह सुरंग आपस में जुड़ी पाई जाती है, तो यह क्षेत्र के प्राचीन सैन्य या सुरक्षा तंत्र से जुड़े अहम साक्ष्य सामने ला सकती है, जिससे इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर नई रोशनी पड़ने की संभावना है।


