नगर निगम के फैसले को एक धड़े का समर्थन, दूसरे ने जताई आपत्ति; हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
देहरादून | 5 मई 2026
देहरादून में किन्नर समाज इन दिनों बधाई धनराशि को लेकर दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। नगर निगम द्वारा बधाई राशि की अधिकतम सीमा 5100 रुपये तय करने के फैसले ने जहां एक वर्ग में संतोष और समर्थन का माहौल बनाया है, वहीं दूसरा पक्ष इसे अपने अधिकारों के खिलाफ बताते हुए विरोध पर उतर आया है।
नगर निगम के फैसले से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, हाल ही में आयोजित नगर निगम की तीन दिवसीय बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि शहर में किन्नर समाज द्वारा ली जाने वाली बधाई धनराशि की अधिकतम सीमा 5100 रुपये होगी। इस निर्णय का उद्देश्य आम लोगों पर आर्थिक बोझ को कम करना बताया गया।
समर्थन में उतरा एक धड़ा
फैसले के बाद किन्नर समाज का एक गुट खुलकर इसके समर्थन में सामने आया है। स्थानीय किन्नरों ने प्रेस वार्ता कर मेयर के इस कदम को सराहनीय बताया। किन्नर करिश्मा ने कहा कि यह निर्णय समाज के सम्मान और संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इससे आम परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कई बार परिवारों की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं होती कि वे 21 हजार या 31 हजार रुपये तक की बधाई राशि दे सकें। ऐसे में यह तय सीमा लोगों को राहत देने वाली है और शोषण जैसी स्थिति से बचाएगी।
विरोध में दूसरा पक्ष, कोर्ट जाने की चेतावनी
वहीं, किन्नर समाज का दूसरा धड़ा इस फैसले से नाराज है। इस गुट का नेतृत्व कर रहीं रजनी रावत ने पहले ही इस निर्णय का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने साफ कहा है कि यह फैसला उनके पारंपरिक अधिकारों में हस्तक्षेप है और अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो वे इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाएंगी।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज
नगर निगम की बैठक के दौरान भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ा था। बैठक के तीसरे दिन एक राज्यमंत्री ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए इसे पुनर्विचार योग्य बताया था। इसके बाद से ही यह मामला शहर के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
किन्नर समाज में बढ़ती खाई
ताजा घटनाक्रम के बाद देहरादून में किन्नर समाज स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंटता दिखाई दे रहा है। एक ओर जहां एक वर्ग प्रशासनिक फैसले को स्वीकार कर रहा है, वहीं दूसरा इसे अपने अस्तित्व और अधिकारों पर चोट मान रहा है।
निष्कर्ष:
बधाई धनराशि को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब किन्नर समाज के भीतर गहरे मतभेद का कारण बन चुका है। नगर निगम के फैसले ने जहां एक वर्ग को राहत दी है, वहीं दूसरे वर्ग में असंतोष और विरोध को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर और अधिक गरमा सकता है, जिससे शहर की सामाजिक एकता पर भी असर पड़ने की आशंका है।


