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देहरादून में नकली दवाइयों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

फेसबुक पेज के जरिए कैंसर, बीपी और गंभीर बीमारियों की फर्जी दवाएं बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार

देहरादून | 22 मई 2026

उत्तराखंड एसटीएफ ने देहरादून में नकली दवाइयों के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह कैंसर, ब्लड प्रेशर, गठिया, संक्रमण और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाइयों को ऑनलाइन बेच रहा था। आरोपियों ने फेसबुक पेज “एसके हेल्थ केयर” के माध्यम से देशभर में जाल बिछा रखा था और नामी कंपनियों की हूबहू नकली दवाइयां आधे दाम में सप्लाई की जा रही थीं।


एसटीएफ के अनुसार, गिरोह लंबे समय से उत्तराखंड समेत कई राज्यों में सक्रिय था। जांच में सामने आया कि नेटवर्क के तार बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ तक फैले हुए हैं। आरोपी सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों को सस्ती दवाइयों का लालच देकर फर्जी दवाएं बेच रहे थे।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि गिरोह रुड़की, भगवानपुर और कोटद्वार स्थित फैक्ट्रियों में नकली दवाइयों का निर्माण कर रहा था। इन दवाइयों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोरियर सेवाओं के जरिए अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था।


एसटीएफ को सूचना मिली थी कि देहरादून बाजार में सनफार्मा, मैनकाइंड, जाइडस, ग्लेनमार्क, टोरेंट और मैकलियोड्स जैसी बड़ी कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बेची जा रही हैं। शिकायत मिलने के बाद विशेष टीम गठित कर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों से संपर्क किया गया और बाजार से बरामद दवाइयों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रिपोर्ट में दवाइयां नकली पाई गईं, जिसके बाद एसटीएफ ने कार्रवाई तेज कर दी।


पुलिस ने इस मामले में संभल निवासी जतिन सैनी और जीएमएस रोड देहरादून निवासी गौरव त्यागी को गिरफ्तार किया है। गौरव त्यागी मूल रूप से मेरठ के खरखौदा क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है।

दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में संगठित अपराध, धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।


पूछताछ में सामने आया कि “एसके हेल्थ केयर” नाम के फेसबुक पेज पर दवा कंपनियों के असली प्रोडक्ट की तस्वीरें डालकर नकली दवाइयां बेची जा रही थीं। ग्राहक कम कीमत देखकर आसानी से जाल में फंस जाते थे। गिरोह असली और नकली दवाओं में अंतर करना लगभग नामुमकिन बना देता था।

एसटीएफ जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नेटवर्क का संचालन उत्तर प्रदेश के संभल से किया जा रहा था, जबकि निर्माण और सप्लाई का काम उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों से संचालित हो रहा था।


गिरफ्तार आरोपी गौरव त्यागी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसकी रुड़की स्थित फैक्ट्री पहले भी नकली दवा बनाने के मामले में पकड़ी जा चुकी है। इसके बावजूद उसने अपने रिश्तेदार मयंक उर्फ मोंटी के साथ मिलकर हरिद्वार के भगवानपुर क्षेत्र में फिर से फर्जी दवाओं का निर्माण शुरू कर दिया था।

उसने पुलिस को बताया कि कोटद्वार के सिडकुल क्षेत्र में स्थित बंद फैक्ट्री को जरूरत पड़ने पर खोला जाता था और वहीं बड़े स्तर पर नकली दवाइयां तैयार की जाती थीं।


कैंसर से लेकर मिर्गी तक की नकली दवाएं बाजार में

एसटीएफ के अनुसार, गिरोह कई गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की नकली खेप तैयार कर रहा था। इनमें गठिया और जोड़ों के दर्द की “न्यूकोक्सिया-90”, ब्लड प्रेशर की “टेलमा”, कैंसररोधी “अबिराप्रो”, महिलाओं में संक्रमण रोकने वाली “क्लिंजन”, एसिडिटी की “पेंटाप डीएसआर”, रक्तस्राव रोकने वाली “ट्रेनाक्सा” और मिर्गी के दौरे रोकने की “गैबापिन-100” जैसी दवाइयां शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नकली दवाइयां मरीजों की जान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं, क्योंकि इनमें जरूरी दवा तत्व या तो बेहद कम मात्रा में होते हैं या बिल्कुल नहीं होते।


निष्कर्ष

देहरादून में सामने आया यह मामला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नकली दवाओं का फैलता कारोबार स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। फिलहाल एसटीएफ पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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