देहरादून, 20 मई 2026
देहरादून की सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से विवाद और दहशत का कारण बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी Savin Bansal की अदालत ने आरोपी बिल्डर को छह माह के लिए जिला बदर करने के साथ ही उसका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया है। प्रशासन ने उसकी 32 बोर लाइसेंसी पिस्टल जब्त कर पुलिस अभिरक्षा में रखने के आदेश जारी किए हैं।
मंगलवार को जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आरोपी की गतिविधियों से क्षेत्र में भय, असुरक्षा और अशांति का माहौल लगातार बन रहा था। अदालत ने माना कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की जाती तो कोई गंभीर आपराधिक घटना हो सकती थी। आदेश के तहत पुनीत अग्रवाल अगले छह महीने तक बिना अनुमति देहरादून जिले की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कारावास और जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है।
मामले की शुरुआत एटीएस कॉलोनी निवासी और डीआरडीओ से जुड़ी वैज्ञानिक हेम शिखा समेत कई स्थानीय निवासियों की शिकायतों से हुई थी। आरोप लगाया गया था कि 13 अप्रैल को बिल्डर ने एक परिवार के साथ मारपीट और अभद्रता की थी। इस हमले में पीड़ित का कान का पर्दा तक फट गया था। शिकायत में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ बदसलूकी करने के आरोप भी लगाए गए थे। घटना के बाद कॉलोनी के लोगों ने आरोपी के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाने की मांग उठाई थी।
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उसका व्यवहार क्षेत्र में लगातार भय का वातावरण बना रहा था। पुलिस एफआईआर, वायरल वीडियो, स्थानीय लोगों की शिकायतें और डीआरडीओ निदेशक मनोज कुमार ढाका की ओर से दी गई शिकायत को भी अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी के खिलाफ डीआरडीओ वैज्ञानिक परिवार से मारपीट, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों को धमकाने, शराब के नशे में उत्पात मचाने, बच्चों पर पिस्टल तानने, गाली-गलौच, वाहन से टक्कर मारने की कोशिश और जमीन कब्जाने जैसे गंभीर मामलों में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत पांच मुकदमे दर्ज हैं।
जिला प्रशासन ने वर्ष 2025 की दीपावली के दौरान हुई उस घटना को भी गंभीर माना, जिसमें आरोपी पर एटीएस कॉलोनी में बच्चों के सामने लाइसेंसी पिस्टल लहराने का आरोप लगा था। उस समय जिलाधिकारी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उसका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था। अब विस्तृत सुनवाई और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के पास हथियार बने रहना लोकशांति और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को एटीएस कॉलोनी के निवासियों ने राहत देने वाला कदम बताया है। लंबे समय से दहशत और तनाव के माहौल में रह रहे स्थानीय लोगों को अब प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा और न्याय की उम्मीद जगी है।


