देहरादून/हरिद्वार, 20 मई 2026
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता Bhuvan Chandra Khanduri का आज हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इसी क्रम में आज प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी का अंतिम संस्कार आज दोपहर 12 बजे हरिद्वार स्थित खड़खड़ी घाट पर किया जाएगा। इससे पहले सुबह 10:30 बजे देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, नेता, अधिकारी और आमजन उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इसके बाद सुबह 11 बजे भाजपा मुख्यालय से उनकी अंतिम यात्रा हरिद्वार के लिए रवाना होगी। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Bhatt समेत कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता अंतिम यात्रा में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री धामी भी हरिद्वार पहुंचकर खड़खड़ी घाट पर अंतिम संस्कार में भाग लेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी का निधन 19 मई की सुबह देहरादून के मैक्स अस्पताल में हुआ था। वह 91 वर्ष के थे और पिछले लगभग एक माह से अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की भावना फैल गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वहीं प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
राज्य सरकार द्वारा घोषित तीन दिवसीय राजकीय शोक के दौरान प्रदेशभर में सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। साथ ही सभी सरकारी कार्यक्रमों में सादगी बरती जाएगी। आज अंत्येष्टि के दिन सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ निजी और सरकारी स्कूल भी बंद रखे गए हैं।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूड़ी को उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदार, अनुशासित और साफ छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में एक बड़ी रिक्तता पैदा हुई है। आज हरिद्वार में होने वाले उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।


