स्थान: देहरादून, उत्तराखंड | दिनांक: 6 मई 2026
देहरादून में रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो पाया है और न ही सरकार की ओर से किसी प्रकार की ठोस मदद सामने आई है। इस बीच मृतक के परिवार ने राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 की सुबह ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) मुकेश जोशी रोज की तरह मॉर्निंग वॉक के लिए मसूरी रोड स्थित जोहड़ी गांव के पास निकले थे। इसी दौरान दो पक्षों के बीच हुई आपसी गोलीबारी में एक गोली उन्हें लग गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस झड़प से उनका कोई लेना-देना नहीं था और वे पूरी तरह निर्दोष थे।
मृतक की पत्नी रेनू जोशी ने इस मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। 16 अप्रैल को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करने और परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनके पति ने 36 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा दी और अपने साहस व समर्पण के लिए सेवा मेडल तथा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किए गए थे।
रेनू जोशी ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 21 और 300ए का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था की विफलता के कारण एक सम्मानित पूर्व सैनिक की सार्वजनिक स्थान पर हत्या हो गई, जो सरकार की गंभीर चूक को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस घटना के बाद प्रशासन और सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन आश्वासनों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार को लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कहीं से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ अब तक पुलिस आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई है, जिससे न्याय प्रक्रिया में देरी हो रही है और परिवार का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
निष्कर्ष:
देहरादून का यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि एक पूर्व सैनिक के परिवार को न्याय के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय व सहायता कब तक मिल पाती है।


