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देहरादून में शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों का मुख्यमंत्री आवास कूच, बैरिकेडिंग पर पुलिस ने रोका; मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन

देहरादून | 12 जुलाई 2026

राजधानी देहरादून में अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत सुभाष रोड स्थित पुलिस मुख्यालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मौके पर ही नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

4 जून से शिक्षा निदेशालय में जारी है अनिश्चितकालीन धरना

शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार पिछले 4 जून से शिक्षा निदेशालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। संगठन का कहना है कि लगातार आंदोलन के बावजूद सरकार या संबंधित विभाग की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के चलते आंदोलन को तेज करते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच का निर्णय लिया गया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रशिक्षित बेरोजगार मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

बैरिकेडिंग पर रोके गए प्रदर्शनकारी

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सुभाष रोड पर पुलिस मुख्यालय से पहले ही रोक दिया। कुछ देर तक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस भी हुई, लेकिन स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया।

बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें जल्द कार्रवाई की मांग की गई।

आरटीई और एनसीटीई के नियमों का दिया हवाला

शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडे ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा छह से आठ तक के छात्र संख्या वाले विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा शिक्षक की नियुक्ति का प्रावधान है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद उत्तराखंड में आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं की गई, जिससे हजारों प्रशिक्षित अभ्यर्थी लंबे समय से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।

विभागों में वर्षों से लंबित बताई नियुक्ति की फाइल

संगठन का कहना है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित फाइल कई वर्षों से विभिन्न विभागों के बीच लंबित पड़ी है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार वित्त विभाग विभागीय पुनर्गठन का हवाला देकर मामले को आगे बढ़ाने में देरी कर रहा है, जबकि शिक्षा विभाग में भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

बेरोजगारों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रही देरी के कारण योग्य और प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की अपील

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक विद्यालय में एक शारीरिक शिक्षा शिक्षक की अनिवार्य नियुक्ति, प्राथमिक विद्यालयों में भी शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के पद सृजित कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करना तथा लंबे समय से भर्ती नहीं होने के कारण प्रभावित अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान करना शामिल है।

संगठन का कहना है कि इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्यक है ताकि वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को रोजगार मिल सके।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज

शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का कहना है कि वह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा तथा जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति भी अपनाई जाएगी।

निष्कर्ष

देहरादून में शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों का मुख्यमंत्री आवास कूच यह दर्शाता है कि लंबे समय से लंबित नियुक्तियों का मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्रदर्शनकारी सरकार से शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और अपनी तीन प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपेक्षा कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस आंदोलन और ज्ञापन पर क्या कदम उठाती है तथा प्रशिक्षित बेरोजगारों की मांगों का समाधान कब तक निकलता है।

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