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हरिद्वार में ‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता को नम आंखों से अंतिम विदाई, पुलिस ने निभाया मानवीय दायित्व

हरिद्वार | 12 जुलाई 2026

हरिद्वार की धार्मिक नगरी में वर्षों तक हरकी पैड़ी के पास श्रद्धालुओं से “भंडारा करा दो बाबूजी…” कहकर जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था कराने वाले ‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं रहे। रविवार को हरिद्वार पुलिस ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से पूरे वैदिक रीति-रिवाज और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों ने उन्हें कंधा देकर अंतिम विदाई दी।

72 घंटे तक परिजनों का इंतजार, फिर पुलिस ने निभाई जिम्मेदारी

रमाशंकर गुप्ता का शव 9 जुलाई को हरकी पैड़ी के समीप स्थित एक शौचालय में मिला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया था। नियमानुसार 72 घंटे तक परिजनों के आने का इंतजार किया गया और उनकी तलाश भी की गई।

जांच के दौरान पुलिस को उनके परिजनों की जानकारी मिल गई और उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के गांव कुंजा में संपर्क भी किया गया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद कोई भी परिजन अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार नहीं पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने एसओपी के तहत लावारिस शव की प्रक्रिया अपनाते हुए सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया।

श्रद्धालुओं के बीच ‘भंडारा किंग’ के नाम से थी अलग पहचान

रमाशंकर गुप्ता पिछले कई वर्षों से हरकी पैड़ी के पास शिवसेतु पर बैठकर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं से गरीबों और जरूरतमंदों के लिए भंडारा कराने की अपील करते थे। उनकी अनोखी शैली और आवाज ने उन्हें अलग पहचान दिलाई थी।

सोशल मीडिया पर उनकी वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें पूरे देश में ‘भंडारा किंग’ बाबा के नाम से पहचान मिली। हरिद्वार आने वाले हजारों श्रद्धालु उन्हें देखकर रुकते थे और अपनी श्रद्धा के अनुसार भंडारा करवाते थे। इससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध होता था।

अचानक हुई मौत से हरिद्वार में शोक

कुछ माह पहले सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने के बाद एक इंफ्लूएंसर उन्हें अपने साथ ले गया था, जहां उनके कई वीडियो बनाए गए। कुछ दिनों पहले वे दोबारा हरिद्वार लौटे थे। इसके बाद अचानक उनका शव मिलने की खबर सामने आई, जिससे उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।

फिलहाल उनकी मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

तीन भाइयों में सबसे छोटे थे रमाशंकर

पुलिस जांच में सामने आया कि रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के गांव कुंजा के निवासी थे। वे कई वर्षों पहले हरिद्वार आकर रहने लगे थे। उनकी कोई संतान नहीं थी और वे तीन भाइयों में सबसे छोटे थे।

पुलिसकर्मियों ने दिया कंधा, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

रविवार को हरकी पैड़ी चौकी प्रभारी संजीत कंडारी, खड़खड़ी चौकी प्रभारी नवीन नेगी, एसआई खेमेंद्र गंगवार सहित कई पुलिस अधिकारियों और जवानों ने रमाशंकर गुप्ता की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की।

खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

श्मशान घाट सेवा समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के उपाध्यक्ष दुर्गेश पंजवानी ने बताया कि समिति लावारिस शवों का भी पूरे सम्मान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अंतिम संस्कार पर लगभग 10 हजार रुपये का खर्च आता है और रमाशंकर गुप्ता का अंतिम संस्कार भी पूरी गरिमा के साथ संपन्न कराया गया।

एसपी सिटी बोले— पुलिस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं

हरिद्वार के एसपी सिटी अभय सिंह ने बताया कि रमाशंकर गुप्ता लंबे समय से हरकी पैड़ी क्षेत्र में रह रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद शव को मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया और निर्धारित समय तक परिजनों की प्रतीक्षा की गई। जब कोई भी अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा, तब पुलिस ने एसओपी के तहत खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति के सहयोग से उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया।

उन्होंने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि समाज और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करना भी है।

निष्कर्ष

हरकी पैड़ी पर वर्षों तक जरूरतमंदों के लिए भंडारे की अपील करने वाले ‘भंडारा किंग’ रमाशंकर गुप्ता भले ही अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी सेवा भावना और जरूरतमंदों के प्रति समर्पण लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा। अंतिम समय में जब अपने भी साथ नहीं थे, तब हरिद्वार पुलिस और खड़खड़ी श्मशान घाट सेवा समिति ने मानवता का परिचय देते हुए उन्हें सम्मानजनक विदाई देकर संवेदनशील पुलिसिंग का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

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