स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 25 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उत्तराखंड कांग्रेस ने इस फैसले को छात्रों और युवाओं के संघर्ष की बड़ी जीत करार देते हुए अब राज्य के तकनीकी शिक्षा एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के इस्तीफे की भी मांग उठाई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि केंद्र में जवाबदेही तय की गई है, तो उत्तराखंड में तकनीकी विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।
देहरादून में प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देशभर के छात्रों और युवाओं के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर जंतर-मंतर से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक छात्रों ने लगातार आंदोलन किए और कांग्रेस ने भी उनके समर्थन में आवाज बुलंद की।
हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के पेपर लीक मामले को लेकर भी कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है। उन्होंने कहा कि आज देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया और राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि देश के युवाओं की एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है। उनके अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़क तक छात्रों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जबकि देशभर के छात्र लगातार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे। इसी जनदबाव के चलते केंद्र सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लंबे समय तक छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करती रही, लेकिन आखिरकार जनभावनाओं के आगे उसे झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब उत्तराखंड में भी तकनीकी विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के संघर्ष की सफलता बताते हुए कहा कि यदि यह फैसला पहले लिया गया होता तो कई छात्रों को मानसिक पीड़ा और निराशा का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील सरकार का दायित्व होता है कि वह जनता और छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए समय पर निर्णय ले।
गणेश गोदियाल ने कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जब किसी मंत्री पर गंभीर आरोप लगने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने उनसे इस्तीफा लिया। उनका आरोप था कि इस मामले में केंद्र सरकार ने लंबे समय तक कार्रवाई करने में देरी की और छात्रों के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया, लेकिन अंततः छात्रों की एकता और संघर्ष की जीत हुई।
उन्होंने उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में 3 जुलाई को दो प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया था। कांग्रेस का आरोप है कि शुरुआत में इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई और जब मामला सार्वजनिक हो गया, तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को भी पद छोड़ देना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि वे इस मामले में शीघ्र निर्णय लेते हुए शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लें और पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें। पार्टी का कहना है कि जब तक इस मामले में जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।
निष्कर्ष
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तराखंड में भी पेपर लीक का मुद्दा राजनीतिक रूप से गर्मा गया है। कांग्रेस इसे छात्रों की ऐतिहासिक जीत बताते हुए राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा रही है और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के इस्तीफे की मांग कर रही है। अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार की अगली रणनीति और जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


