स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 25 जुलाई 2026
उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) की नियुक्तियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नियुक्तियों की प्रक्रिया पर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने विभागीय मंत्री पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। संघ का दावा है कि नियमों को दरकिनार कर विभिन्न नगर निकायों में प्रभारी ईओ की नियुक्तियां की गईं और प्रत्येक पोस्टिंग के लिए 15-15 लाख रुपये लेने का खेल हुआ है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया है।
शुक्रवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा शहरी विकास निदेशालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और शहरी विकास विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए विवादित नियुक्ति आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका कहना था कि सरकार ने नियमित भर्ती प्रक्रिया अपनाने के बजाय विभागीय कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाकर योग्य और बेरोजगार युवाओं के रोजगार के अवसर छीन लिए हैं।
प्रदर्शन के दौरान राम कंडवाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश के नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों के अनेक पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन रिक्त पदों पर पारदर्शी भर्ती निकालने के बजाय क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाकर नियुक्त कर दिया गया, जबकि सेवा नियमों के अनुसार वे इस पद के लिए पात्र नहीं हैं।
बेरोजगार संघ ने शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि प्रत्येक प्रभारी ईओ की तैनाती के लिए 15-15 लाख रुपये लेकर नियुक्तियां की गई हैं। हालांकि संगठन ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए। संघ ने कहा कि यदि सरकार को इन आरोपों पर आपत्ति है तो पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विवादित आदेश वापस नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा। राम कंडवाल ने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में प्रदेशभर से बेरोजगार युवा देहरादून पहुंचकर विभागीय मंत्री के आवास का घेराव करेंगे और अनिश्चितकालीन धरना देंगे। उन्होंने कहा कि जब तक नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती और आदेश वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दरअसल, हाल ही में शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी नियुक्त करने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के तहत क्लर्क, कर संग्रहकर्ता, सफाई निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई। विभाग में अधिशासी अधिकारियों के लगभग 60 स्वीकृत पद बताए जाते हैं, जिनमें से कई लंबे समय से रिक्त हैं। इन्हीं रिक्तियों के चलते विभाग ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में यह निर्णय लिया था।
इन नियुक्तियों के बाद सेवा नियमों और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकाय (केंद्रीयकृत) सेवा नियमावली-2016 तथा पूर्व में लागू नियमों के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया, वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर की जानी चाहिए। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों को सीधे प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी देना नियमों की भावना के विपरीत माना जा रहा है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नैनीताल हाईकोर्ट पहले ही नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों की कमी पर चिंता जता चुका है। वर्ष 2025 में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रिक्त पदों के संबंध में उचित निर्णय लेने और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। बेरोजगार संघ का आरोप है कि सरकार ने नियमित भर्ती के बजाय अस्थायी व्यवस्था अपनाकर न्यायालय की मंशा के अनुरूप समाधान नहीं किया।
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि प्रदेश में हजारों अभ्यर्थी वर्षों से सरकारी भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं। यदि अधिशासी अधिकारियों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती निकाली जाती तो बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिलता। उनका आरोप है कि विभागीय व्यवस्था के नाम पर इन अवसरों को समाप्त कर बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किया गया है।
बेरोजगार संघ ने सरकार से मांग की है कि विवादित नियुक्ति आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं, पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा अधिशासी अधिकारियों के सभी रिक्त पदों पर पारदर्शी और नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
वहीं, समाचार लिखे जाने तक शहरी विकास विभाग अथवा विभागीय मंत्री राम सिंह कैड़ा की ओर से बेरोजगार संघ द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले में सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना अभी बाकी है।
निष्कर्ष
प्रभारी अधिशासी अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर बेरोजगार संघ नियुक्ति प्रक्रिया और कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। अब पूरे मामले में सरकार की प्रतिक्रिया, संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर प्रदेशभर के युवाओं और संबंधित पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।


