स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तारीख: 02 अगस्त 2026
देहरादून के नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड धंसने के मामले में जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जांच में पुल के डिजाइन, सुरक्षा प्रबंधों और तकनीकी परीक्षण प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में पुल निर्माण से जुड़े कंसल्टेंट और आईआईटी बीएचयू की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
हालांकि जांच रिपोर्ट को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का उल्लेख किया गया है।
क्षेत्रीय मुख्य अभियंता ने सौंपी जांच रिपोर्ट
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसने की घटना के बाद लोक निर्माण विभाग ने मामले की जांच क्षेत्रीय मुख्य अभियंता दयानंद को सौंपी थी। विस्तृत तकनीकी जांच पूरी करने के बाद उन्होंने शनिवार को अपनी रिपोर्ट विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी।
जांच का उद्देश्य धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाना और निर्माण कार्य में हुई संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करना था।
एप्रोच रोड धंसने के पीछे नदी के बदले बहाव को माना गया कारण
जांच के दौरान पाया गया कि टौंस नदी का बहाव एकतरफा एप्रोच रोड की ओर मुड़ गया था, जिससे सड़क के नीचे की मिट्टी और संरचना प्रभावित हुई।
रिपोर्ट के अनुसार नदी के बहाव में बदलाव के पीछे अस्थायी पुलिया के अवशेषों को समय पर नहीं हटाया जाना तथा नदी क्षेत्र में बनी एक गौशाला भी प्रमुख कारणों में शामिल रही। इन कारणों से नदी का दबाव एप्रोच रोड की दिशा में बढ़ गया, जिसके चलते सड़क धंस गई।
डिजाइन में नहीं थे अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान
सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नदी की धारा पहले से असामान्य रूप से परिवर्तित थी। इसके बावजूद पुल के डिजाइन में इस संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल नहीं किए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजाइन तैयार करने वाले कंसल्टेंट ने इस महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी की। बाद में जब इस डिजाइन का तकनीकी परीक्षण आईआईटी बीएचयू को भेजा गया, तब भी इस संबंध में कोई अतिरिक्त सुझाव नहीं दिए गए और डिजाइन को उपयुक्त मान लिया गया।
इसी आधार पर रिपोर्ट में डिजाइन तैयार करने वाले कंसल्टेंट और तकनीकी परीक्षण करने वाली संस्था की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि केवल कंसल्टेंट या तकनीकी संस्थान ही नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल के डिजाइन को अंतिम मंजूरी देने से पहले अधीक्षण अभियंता और अन्य जिम्मेदार अधिकारी उसकी तकनीकी समीक्षा करते हैं। ऐसे में सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रावधानों की कमी के लिए विभागीय स्तर पर भी जवाबदेही तय होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
जिस अतिवृष्टि से पुल टूटा, उसी जोखिम को नहीं मिला डिजाइन में स्थान
पिछले वर्ष सितंबर 2025 में अत्यधिक वर्षा के दौरान नंदा की चौकी का पुराना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसी अनुभव को देखते हुए नए निर्माण में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
लेकिन जांच में सामने आया कि पुनर्निर्माण के दौरान उसी प्रकार की अतिवृष्टि और तेज जल प्रवाह से निपटने के लिए पर्याप्त संरचनात्मक सुरक्षा उपाय नहीं जोड़े गए। इस कारण रिपोर्ट में योजना निर्माण और तकनीकी दूरदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
सुरक्षा दीवार के निर्माण पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पहले बनी सुरक्षा दीवार नदी की वास्तविक चौड़ाई के अनुरूप पीछे की ओर स्थित थी। जबकि पुनर्निर्माण के दौरान नई सुरक्षा दीवार को कई मीटर आगे बढ़ाकर बनाया गया।
बताया जा रहा है कि इससे नदी की प्राकृतिक चौड़ाई प्रभावित हुई और दीवार के पीछे अतिरिक्त स्थान बन गया। यदि इस स्थान का उपयोग अन्य निर्माण कार्यों के लिए किया जाता है, तो भविष्य में नदी के प्राकृतिक बहाव और बाढ़ की स्थिति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में इस प्रकार का हस्तक्षेप भविष्य में और बड़े जोखिम पैदा कर सकता है।
28 जुलाई को धंसी थी एप्रोच रोड
गौरतलब है कि टौंस नदी की अस्थायी पुलिया तेज बहाव में बह जाने के बाद 12 जुलाई 2026 को नंदा की चौकी पुल पर यातायात दोबारा शुरू किया गया था। लेकिन संचालन शुरू होने के करीब दो सप्ताह बाद 28 जुलाई की सुबह लगभग पांच बजे पुल की एप्रोच रोड अचानक धंस गई।
घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य कराया गया और लगभग 12 घंटे के भीतर सड़क की मरम्मत कर यातायात दोबारा बहाल कर दिया गया था।
निष्कर्ष
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसने की जांच रिपोर्ट ने निर्माण प्रक्रिया, तकनीकी परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार डिजाइन में सुरक्षा उपायों की कमी, नदी के बदले बहाव की अनदेखी और तकनीकी परीक्षण के दौरान आवश्यक सुझावों का अभाव इस घटना के प्रमुख कारण रहे। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार जांच रिपोर्ट के आधार पर किन अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के खिलाफ जवाबदेही तय करती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


