स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
तारीख: 02 अगस्त 2026
कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान हरिद्वार में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम ने एक अनूठी पहल शुरू की है। अब गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान के बाद छोड़े गए पुराने कपड़े कूड़े में नहीं फेंके जाएंगे, बल्कि उनका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण कर पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) किया जाएगा। इन वस्त्रों से रीसाइकिल्ड कॉटन फाइबर तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।
इसके साथ ही नगर निगम ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के उद्देश्य से “प्लास्टिक एक्सचेंज अभियान” भी शुरू किया है। इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं से प्रतिबंधित पॉलीथीन लेकर उन्हें निशुल्क कम्पोस्टेबल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे को कम करने की दिशा में प्रभावी प्रयास किया जा सके।
कांवड़ मेले में दोगुना बढ़ जाता है कूड़े का दबाव
हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र से सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 200 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन कांवड़ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण यह मात्रा लगभग दोगुनी हो जाती है। बढ़ते कचरे के प्रभावी प्रबंधन और गंगा घाटों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर निगम ने व्यापक स्तर पर विशेष अभियान चलाया है।
नगर निगम ने नेचर फाउंडेशन के सहयोग से प्रमुख घाटों पर पुराने वस्त्रों के अलग संग्रहण की व्यवस्था की है, ताकि इनका उचित निस्तारण करने के बजाय पुनर्चक्रण किया जा सके।
प्रमुख घाटों पर लगाए गए विशेष डस्टबिन, 20 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती
हरकी पैड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट, नाई घाट, विष्णु घाट और सीसीआर घाट सहित प्रमुख स्नान स्थलों पर विशेष डस्टबिन लगाए गए हैं। यहां लगभग 20 प्रशिक्षित स्वच्छता कर्मी तैनात किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़ों को अलग-अलग एकत्र कर सराय स्थित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर भेज रहे हैं।
एमआरएफ सेंटर में इन वस्त्रों का वजन दर्ज कर सुरक्षित रखा जा रहा है। कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद इन कपड़ों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण कर रीसाइकिल्ड कॉटन फाइबर तैयार किया जाएगा। वहीं अन्य सामान्य कचरे का निस्तारण नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन संयंत्र में किया जा रहा है।
प्लास्टिक एक्सचेंज अभियान से मिल रहा सकारात्मक संदेश
नगर निगम द्वारा शुरू किए गए प्लास्टिक एक्सचेंज अभियान के तहत श्रद्धालुओं से प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथीन लेकर उनके स्थान पर पर्यावरण अनुकूल कम्पोस्टेबल बैग वितरित किए जा रहे हैं।
नगर निगम की टीमें लगातार लोगों को प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों और उसके विकल्पों के बारे में जागरूक कर रही हैं। इसके लिए घाटों पर लाउडस्पीकर और मेगाफोन के माध्यम से लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालु प्लास्टिक का उपयोग कम करें और कूड़ा निर्धारित डस्टबिन में ही डालें।
जागरूकता पर अधिक जोर, दंड पर नहीं
सहायक नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी ने बताया कि कांवड़ मेले में प्राथमिकता लोगों को जागरूक करने की है, न कि केवल जुर्माना लगाने की। घाटों पर तैनात स्वच्छता दूत लगातार श्रद्धालुओं से अपील कर रहे हैं कि वे गंगा में प्लास्टिक, कपड़े या अन्य अपशिष्ट न डालें तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
नगर निगम का उद्देश्य व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल कांवड़ यात्रा सुनिश्चित करना है।
श्रद्धालुओं ने भी की पहल की सराहना
कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने नगर निगम की इस पहल को सराहनीय बताया। श्रद्धालु उमेश नरवाल और बाबल ने कहा कि केवल प्रशासन के प्रयासों से ही स्वच्छता संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ हरिद्वार बनाने में सहयोग देना होगा।
उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति थोड़ी जिम्मेदारी निभाए, तो गंगा घाटों को स्वच्छ रखना अधिक आसान हो जाएगा।
अवैध पॉलीथीन पर लगातार कार्रवाई
नगर निगम स्वच्छता अभियान के साथ-साथ प्रतिबंधित पॉलीथीन के खिलाफ भी लगातार कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में हरकी पैड़ी के समीप एक गोदाम से लगभग 50 किलोग्राम प्रतिबंधित पॉलीथीन जब्त की गई है, जिस पर जुर्माने की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इससे पहले भी हरिद्वार में एक अन्य गोदाम से लगभग 5,000 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथीन बरामद की गई थी, जिसके बाद संबंधित संचालक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
कांवड़ मेले के बाद भी जारी रहेगा अभियान
नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि हर वर्ष गंगा घाटों पर बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े छोड़े जाने से उनके निस्तारण की चुनौती सामने आती है। नई व्यवस्था के लागू होने से घाटों की स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल कांवड़ मेले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी इसे नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। वर्तमान में नगर निगम की टीमें दिन-रात कूड़ा उठान और सफाई कार्य में जुटी हुई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
निष्कर्ष
हरिद्वार नगर निगम की यह पहल केवल कूड़ा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त समाज और संसाधनों के पुनर्चक्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। श्रद्धालुओं के सहयोग और प्रशासन की सक्रियता से कांवड़ यात्रा को स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की यह मुहिम भविष्य के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।



