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महिला सुरक्षा को मिलेगा नया सुरक्षा कवच, हल्द्वानी में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित; पीड़िताओं को त्वरित न्याय और मानसिक संबल पर विशेष जोर

हल्द्वानी (नैनीताल) | 18 जुलाई 2026

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से उत्तराखंड राज्य महिला आयोग द्वारा शनिवार को हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़िताओं को त्वरित सहायता, कानूनी संरक्षण, मानसिक परामर्श और पुनर्वास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुमाऊँ मंडल के सभी जनपदों से वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) के काउंसिलर, केस वर्कर, महिला पुलिसकर्मी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के अधिवक्ता, संरक्षण अधिकारी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे प्रशिक्षित “मास्टर ट्रेनर्स” तैयार करने की योजना बनाई गई, जो आगे चलकर जिले और ब्लॉक स्तर पर महिला सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाएंगे।

कार्यशाला का शुभारंभ लालकुआँ विधायक मोहन सिंह बिष्ट, नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल (आईएएस), उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी तथा उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उपस्थित अतिथियों ने महिला आयोग की इस पहल को महिलाओं की सुरक्षा, न्याय और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि किसी भी पीड़ित महिला को केवल कानूनी सहायता उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे मानसिक रूप से संभालना, सुरक्षित वातावरण देना और उसकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला सामाजिक दबाव, भय और मानसिक तनाव के बीच सहायता के लिए आगे आती है, तब संबंधित अधिकारियों की संवेदनशीलता उसकी जिंदगी बदल सकती है।

उन्होंने कहा कि संकट की पहली घड़ी, जिसे “गोल्डन आवर” कहा जाता है, सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान पीड़िता को सम्मानजनक व्यवहार, मानसिक सहयोग और त्वरित कानूनी सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस, महिला आयोग, विधिक सेवा प्राधिकरण और वन स्टॉप सेंटरों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी विभागों को मिलकर पीड़ित महिलाओं के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार करना होगा।

पुलिस विभाग की मुख्य वक्ता उपनिरीक्षक सुनीता कुंवर ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड पुलिस की त्रिस्तरीय व्यवस्था की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिला चीता वाहिनी, डायल-112 सेवा, महिला हेल्पडेस्क और वन स्टॉप सेंटरों की समन्वित कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। साथ ही साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों तथा डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी।

विधिक सत्र में अभियोजन विभाग के पूर्व अपर निदेशक (विधि) हरि विनोद जोशी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पोक्सो अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम तथा महिलाओं से जुड़े अन्य कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को नवीन कानूनी प्रावधानों और संवेदनशील मामलों में कानूनी प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में प्रशिक्षित किया।

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. ललित मोहन पंत ने मानसिक आघात से गुजर रही महिलाओं की काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा से पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास में संवेदनशील व्यवहार और वैज्ञानिक काउंसलिंग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

हल्द्वानी की चिकित्सक डॉ. ऐश्वर्या कांडपाल ने कहा कि यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखना चिकित्सा संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मेडिकल परीक्षण, प्राथमिक उपचार और पीड़िता के सम्मान की रक्षा से जुड़े चिकित्सा मानकों पर विस्तार से जानकारी दी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की प्रतिनिधि आरती बलोदी ने वन स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज के पूर्वाग्रह और सामाजिक दबाव के कारण बड़ी संख्या में पीड़ित महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से भी पीछे हट जाती हैं। उन्होंने अधिकारियों से सर्वाइवर-सेंट्रिक दृष्टिकोण अपनाने और पीड़ित महिलाओं को सरकारी योजनाओं का तत्काल लाभ उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

कार्यशाला के समापन सत्र में कुमाऊँ मंडल के विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों और हेल्पडेस्क प्रभारियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा महिला सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक प्रश्नों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया।

इस अवसर पर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो, विधायक मोहन सिंह बिष्ट, कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, आयोग की सदस्य विमला अधिकारी, डॉ. रेनू प्रकाश, डॉ. नमिता वर्मा, डॉ. आशुतोष पंत, आधार वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और महिला सुरक्षा से जुड़े अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

हल्द्वानी में आयोजित यह राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और समन्वित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। प्रशिक्षण के माध्यम से तैयार किए जा रहे “मास्टर ट्रेनर्स” भविष्य में जमीनी स्तर पर महिला सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेंगे। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी पीड़िता को केवल न्याय ही नहीं, बल्कि सम्मान, मानसिक संबल, गोपनीयता और समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराना ही वास्तविक महिला सशक्तिकरण की आधारशिला है।

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