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राहुल गांधी के ‘पेपर लीक एपिसेंटर’ वाले आरोप पर अमित मालवीय का पलटवार, बोले- भर्ती घोटालों की शुरुआत कांग्रेस शासन में हुई

देहरादून | 17 जुलाई 2026

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के देहरादून दौरे से पहले उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर उत्तराखंड को पेपर लीक का “एपिसेंटर” बताए जाने वाले पोस्ट के जवाब में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय आईटी सेल संयोजक अमित मालवीय ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर भर्ती घोटालों की नींव रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को आधा सच नहीं, बल्कि पूरा इतिहास बताया जाना चाहिए।

राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट पर बीजेपी का जवाब

राहुल गांधी अपने देहरादून दौरे के तहत आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले सोशल मीडिया पर लगातार युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने उत्तराखंड को पेपर लीक का “एपिसेंटर” बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित मालवीय ने कहा कि देहरादून आने से पहले राहुल गांधी को प्रदेश के युवाओं को यह भी बताना चाहिए कि भर्ती घोटालों की शुरुआत आखिर किस दौर में हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों की जड़ें कांग्रेस शासनकाल तक जाती हैं।

कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल का किया उल्लेख

अमित मालवीय ने अपने बयान में उत्तराखंड की पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार का उल्लेख करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में दरोगा भर्ती और पटवारी भर्ती को लेकर उठे विवादों का हवाला दिया।

इसके अलावा उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल के दौरान हुई यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा, सिडकुल भर्ती विवाद, एसआईटी जांच, यूबीटीईआर तथा आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान कई भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल उठे, जांच एजेंसियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई भर्तियां निरस्त करनी पड़ीं, जिससे युवाओं का सरकारी भर्ती प्रणाली पर विश्वास कमजोर हुआ।

धामी सरकार की कार्रवाई का किया बचाव

अमित मालवीय ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में जब यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तब सरकार ने उसे दबाने के बजाय कठोर कार्रवाई की।

उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसके तहत 100 से अधिक कथित नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। साथ ही भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का काम किया गया।

कांग्रेस और बीजेपी के कामकाज की तुलना

अमित मालवीय ने अपने बयान में कांग्रेस और भाजपा की कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भर्ती घोटाले सामने आते रहे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान जैसे ही अनियमितताओं की जानकारी मिली, कानून बनाया गया, जांच कराई गई, गिरफ्तारियां हुईं और पूरी व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाए गए।

उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि जिन भर्ती घोटालों की शुरुआत कांग्रेस सरकारों के समय हुई, उनके लिए आखिर जवाबदेह कौन था।

युवाओं को लेकर कही यह बात

अमित मालवीय ने कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं को अच्छी तरह याद रखता है। उनके अनुसार युवाओं के सामने केवल भाषण नहीं बल्कि सरकारों का रिकॉर्ड भी मौजूद है।

उन्होंने कहा कि एक ओर भर्ती घोटालों का पुराना इतिहास है, जबकि दूसरी ओर वर्तमान सरकार द्वारा पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, नकल विरोधी कानून और योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विजय बहुगुणा के कार्यकाल का नहीं किया उल्लेख

अमित मालवीय के बयान में कांग्रेस शासनकाल के कई मामलों का उल्लेख किया गया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल का जिक्र नहीं किया गया। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि विजय बहुगुणा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष

राहुल गांधी के देहरादून दौरे और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम से पहले पेपर लीक और भर्ती घोटालों का मुद्दा प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। राहुल गांधी ने जहां भाजपा सरकार पर भर्ती व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा ने कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल के पुराने मामलों का हवाला देकर जवाबी हमला किया है। आने वाले दिनों में रोजगार, भर्ती और युवाओं के मुद्दों पर प्रदेश की राजनीति और अधिक तेज होने की संभावना है।

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