हल्द्वानी (नैनीताल) | 17 जुलाई 2026
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अपने दो दिवसीय हल्द्वानी दौरे के दौरान शुक्रवार को उप जिला कारागार, हल्द्वानी का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल में महिला बंदियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। साथ ही महिला कैदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, खान-पान, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली।
महिला आयोग अध्यक्ष ने जेल प्रशासन द्वारा महिला बंदियों के सुधार और आत्मनिर्भरता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कारागार केवल सजा का स्थान नहीं बल्कि सुधार और नए जीवन की शुरुआत का माध्यम भी होना चाहिए।
महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान कुसुम कंडवाल ने महिला बंदियों को दिए जा रहे कौशल विकास प्रशिक्षण का जायजा लिया। जेल प्रशासन द्वारा स्थापित आधुनिक मशीनों के माध्यम से महिलाओं को सिलाई, बुनाई और कढ़ाई का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगारपरक कौशल सीखने के साथ-साथ अपनी आय भी अर्जित कर रही हैं।
महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
जेल में तैयार हो रहे बेकरी उत्पाद, बाजार तक पहुंच रही सामग्री
कारागार में संचालित बेकरी इकाई का भी निरीक्षण किया गया। यहां महिला बंदियों द्वारा विभिन्न प्रकार के बेकरी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें कारागार प्रशासन के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाता है।
इसके अलावा महिला बंदियां सिलाई कार्य भी कुशलता के साथ कर रही हैं। इस कार्य से उन्हें आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है, जिससे उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो रही है।
उच्च शिक्षा से जुड़ रहीं महिला कैदी
निरीक्षण के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि जेल प्रशासन महिला बंदियों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से महिला कैदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि रिहाई के बाद वे बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें और समाज की मुख्यधारा से सम्मानपूर्वक जुड़ सकें।
ब्यूटीशियन कोर्स से रोजगार के नए अवसर
महिला आयोग अध्यक्ष ने जेल में हाल ही में संचालित ब्यूटीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी अवलोकन किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिला बंदियों को ऐसा व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है, जिससे वे जेल से बाहर आने के बाद स्वरोजगार शुरू कर सकें।
कुसुम कंडवाल ने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समाज में सम्मानजनक पुनर्वास का मजबूत आधार तैयार करता है।
चिकित्सा सुविधाओं का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान महिला आयोग अध्यक्ष ने जेल परिसर में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, उपचार व्यवस्था और महिला बंदियों को दी जा रही चिकित्सीय सुविधाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के बाद उन्होंने चिकित्सा व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बंदियों के स्वास्थ्य और देखभाल के प्रति संवेदनशील व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना
कुसुम कंडवाल ने कहा कि हल्द्वानी उप जिला कारागार में महिला बंदियों के सुधार, शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने जेल प्रशासन से इन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा महिलाओं को अधिक से अधिक रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि महिला बंदियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना दिलाने के लिए शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भरता सबसे महत्वपूर्ण साधन हैं।
निरीक्षण के दौरान रहे उपस्थित
इस अवसर पर उप जिला कारागार हल्द्वानी के अधीक्षक प्रमोद कुमार, डिप्टी जेलर रचित बोंठियाल, डिप्टी जेलर नीलम धामी, डॉ. पलक मित्तल, प्रतिभा जोशी, आधार वर्मा सहित कारागार प्रशासन के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
हल्द्वानी उप जिला कारागार का निरीक्षण यह दर्शाता है कि उत्तराखंड की जेलों में महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक पहल की जा रही है। कौशल विकास, उच्च शिक्षा, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, बेकरी इकाई और सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यक्रम महिला बंदियों को नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इन प्रयासों को प्रभावी बताते हुए भविष्य में भी सुधारात्मक और पुनर्वास संबंधी योजनाओं को और मजबूत बनाने पर बल दिया।


