स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 24 अगस्त 2026
वंदे मातरम् को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा वंदे मातरम् के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का संबंध देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके ऐतिहासिक मूल्यों से है, जबकि भाजपा का इस ऐतिहासिक विरासत से कोई सीधा रिश्ता नहीं रहा है।
हरीश रावत ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने वंदे मातरम् के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड में वंदे मातरम् को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़कर समझाया वंदे मातरम् का इतिहास
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का महत्वपूर्ण गीत रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आजादी की लड़ाई से जुड़े मूल्यों, मान्यताओं और सिद्धांतों से खुद को अलग नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक संगठन की ओर से कोई भी प्रस्ताव पारित किया जा सकता है, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों और कांग्रेस की कार्यसमिति द्वारा तय किए गए मूल्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रावत के अनुसार, कांग्रेस के लिए स्वतंत्रता संग्राम केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक और वैचारिक आधार का हिस्सा है।
1937 की कांग्रेस कार्यसमिति का किया उल्लेख
हरीश रावत ने वंदे मातरम् के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने इस गीत को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। उनके अनुसार, उस समय महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में एक उपसमिति गठित की गई थी।
उन्होंने बताया कि इस समिति में सुभाष चंद्र बोस, आचार्य नरेंद्र देव, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित कई प्रमुख नेता शामिल थे। रावत के मुताबिक, समिति ने रवींद्रनाथ टैगोर के मार्गदर्शन में वंदे मातरम् के उपयोग से संबंधित निर्णय लिया था।
आजादी की लड़ाई में गीत की भूमिका बताई
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच वंदे मातरम् का विशेष महत्व था।
उनके मुताबिक, आजादी से पहले भी स्वतंत्रता सेनानी इस गीत को अपने आंदोलनों और कार्यक्रमों में गाते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस के विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत वंदे मातरम् से करने की परंपरा जारी रही है।
रावत ने कहा कि कांग्रेस के लिए वंदे मातरम् केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति और उस दौर के संघर्ष से जुड़ी भावना है।
भाजपा पर लगाया राजनीतिक लाभ लेने का आरोप
हरीश रावत ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ को समझे बिना इसे राजनीतिक बहस का विषय बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्वतंत्रता संग्राम की उस ऐतिहासिक प्रक्रिया से वैसा संबंध नहीं रहा, जैसा कांग्रेस और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेताओं का रहा है।
उन्होंने अपने बयान में भाजपा पर वंदे मातरम् की ऐतिहासिक विरासत पर राजनीतिक दावा करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी कांग्रेस
रावत ने कहा कि कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान निर्धारित मूल्यों और सिद्धांतों से पीछे नहीं हट सकती। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई केवल सत्ता परिवर्तन का आंदोलन नहीं था, बल्कि उसके पीछे लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता की व्यापक भावना थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वर्तमान पीढ़ी भी स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इन मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तराखंड में बढ़ सकती है राजनीतिक बयानबाजी
वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी अब उत्तराखंड में भी राजनीतिक बहस का रूप लेती दिखाई दे रही है। भाजपा जहां राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रही है, वहीं कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और अपनी भूमिका का हवाला देकर भाजपा पर पलटवार कर रही है।
हरीश रावत के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।
निष्कर्ष
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई बहस अब उत्तराखंड की राजनीति में इतिहास, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के सवाल तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा पर इस ऐतिहासिक गीत के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है और कांग्रेस की स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी भूमिका को सामने रखा है। आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया आने के साथ ही यह सियासी मुद्दा और गर्म होने की संभावना है।


