इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी से शुरू हुई बातचीत, विरोध करने पर दी धमकी; पुलिस ने पॉक्सो समेत कई धाराओं में दर्ज किया केस
स्थान: हल्द्वानी (नैनीताल) | तारीख: 1 मई 2026
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की को धर्मांतरण के लिए कथित तौर पर दबाव में डाला गया। विरोध करने पर आरोपी युवक ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला लालकुआं क्षेत्र का है, जहां एक युवक द्वारा नाबालिग को लगातार परेशान किए जाने की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी को प्राप्त हुई थी। शिकायत मिलते ही उन्होंने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जांच में सामने आया कि करीब दो महीने पहले आरोपी ने इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाकर पीड़िता से संपर्क किया था। शुरुआत में सामान्य बातचीत के बाद आरोपी ने धीरे-धीरे नाबालिग की निजी जानकारी हासिल कर ली और फिर मोबाइल नंबर लेकर संपर्क बढ़ाता गया।
आरोप है कि विश्वास में लेने के बाद आरोपी ने नाबालिग के साथ छेड़छाड़ की और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उसे एआई तकनीक से आपत्तिजनक सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट और उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि जिले में धर्मांतरण या नाबालिगों से जुड़े अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
हल्द्वानी का यह मामला साइबर अपराध और सामाजिक सुरक्षा दोनों दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। एआई तकनीक के दुरुपयोग के साथ नाबालिग पर दबाव बनाने की घटना ने कानून-व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी की है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी घटना को समय रहते रोक दिया, लेकिन यह मामला डिजिटल सतर्कता और जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर करता है।


