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23 साल बाद फिर सुर्खियों में जेनी प्रकरण, हरक सिंह रावत पर लगाए गंभीर आरोप; मसूरी और होटल ले जाने का भी किया दावा

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 7 नवंबर 2026

देहरादून: उत्तराखंड का करीब 23 साल पुराना जेनी प्रकरण एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। देहरादून पहुंची जेनी उर्फ इंदिरा देवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने पुराने घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह कई बार भावुक भी हुईं और कहा कि उन्हें और उनके बेटे को अब न्याय मिलना चाहिए।

16 साल की उम्र में देहरादून आने का किया दावा

जेनी ने बताया कि वह अक्टूबर 2002 में असम से देहरादून आई थीं। उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी। उन्होंने दावा किया कि वह यमुना कॉलोनी में लगभग दो महीने तक रही थीं।

महिला के मुताबिक, देहरादून में रहते हुए वह प्रिंस चौक स्थित एक एसटीडी बूथ पर काम करती थीं। इसी दौरान वहां हरक सिंह रावत का एक कार्यकर्ता फोन करने आता था। महिला ने बताया कि उन्होंने उस कार्यकर्ता से नौकरी दिलाने की बात कही थी।

उनके अनुसार, उन्हें बताया गया था कि टिहरी गढ़वाल में एक संस्था के रिसेप्शन पर काम मिल सकता है, लेकिन नौकरी दिलाने के नाम पर उन्हें यमुना कॉलोनी स्थित हरक सिंह रावत के आवास पर ले जाया गया।

सरकारी गाड़ी से मसूरी और होटल ले जाने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने आरोप लगाया कि हरक सिंह रावत की सरकारी गाड़ी से उन्हें कई बार बाहर ले जाया गया। इनमें मसूरी और एक होटल जाना भी शामिल था।

जेनी ने पूर्व मंत्री पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय वह नाबालिग थीं और अपनी परिस्थितियों के कारण किसी से मदद नहीं मांग सकीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में उन्होंने हरक सिंह रावत से अपने बच्चे को पिता का नाम देने की बात कही थी, लेकिन वहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

महिला के मुताबिक, बाद में वह अपने बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए एक बार देहरादून आई थीं। इस दौरान उन्हें दोबारा यहां कदम नहीं रखने की बात कही गई थी।

गर्भावस्था के दौरान मानसिक अस्पताल में रखने का आरोप

जेनी ने अपने पुराने अनुभवों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय उन्हें मानसिक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। उनका कहना है कि वह गर्भवती थीं, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

महिला ने दावा किया कि उन्हें धमकाकर वहां से बाहर निकाल दिया गया और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए। उनके अनुसार, सीबीआई की टीम उनसे मिलने मानसिक अस्पताल में केवल एक बार पहुंची थी।

उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें हिंदी भाषा की जानकारी भी नहीं थी, जिसके कारण वह अपनी बात सही तरीके से अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाईं।

DNA टेस्ट पर उठाए सवाल, बेटे को पिता का नाम दिलाने की मांग

इस पूरे मामले में जेनी ने सबसे बड़ा सवाल डीएनए जांच को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि जब उनके बेटे का डीएनए सैंपल ही नहीं लिया गया, तो फिर डीएनए जांच किस आधार पर हुई?

महिला ने दोबारा डीएनए टेस्ट कराने और पूरे मामले की नए सिरे से सीबीआई जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके बेटे को भी अपने पिता की पहचान जानने और उनका नाम पाने का अधिकार है।

उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड के डीजीपी को अपनी शिकायत सौंप चुकी हैं। महिला ने यह भी कहा कि उनका वकील उनसे केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाता है, जबकि वह चाहती हैं कि मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच हो।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद देहरादून लौटने का फैसला

जेनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक रूप से उनके नाम का जिक्र किया, तब उन्होंने दोबारा देहरादून आने और अपनी बात रखने का निर्णय लिया।

उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद इस मामले का जिक्र होने से उन्हें अपनी बात सामने रखने का अवसर मिला है।

वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को लेकर सवाल पूछे जाने पर महिला ने कहा कि वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती हैं।

पहले वीडियो जारी कर नेताओं को दी थी चेतावनी

प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ दिन पहले जेनी का एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं पर उनके नाम का इस्तेमाल कर एक-दूसरे पर आरोप लगाने और अभद्र टिप्पणियां करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा था कि उनके साथ वास्तव में क्या हुआ, यह केवल उन्हें पता है और वह समय आने पर सबूतों के साथ अपनी बात रखेंगी।

महिला ने नेताओं से डीएनए टेस्ट को लेकर एक-दूसरे पर बयानबाजी बंद करने की अपील भी की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह खुद सामने आकर बताएंगी कि वर्ष 2003 या उसके आसपास उनके साथ क्या घटनाक्रम हुआ था।

निष्कर्ष

करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण में महिला की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ महिला ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए परीक्षण की मांग की है, वहीं अब पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी निगाहें हैं।

फिलहाल महिला के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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