स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 7 नवंबर 2026
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराना महिला उत्पीड़न प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी के बीच अब उस महिला का वीडियो सामने आया है, जिनका नाम इस विवाद से जुड़ता रहा है। महिला ने वीडियो जारी कर दावा किया है कि वह जल्द ही सामने आकर पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सबूतों के साथ सार्वजनिक करेंगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नेताओं पर नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप
सामने आए वीडियो में महिला ने उत्तराखंड के विभिन्न राजनीतिक नेताओं पर उनके नाम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने और उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है।
महिला का कहना है कि वर्ष 2003 में या उस दौरान उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था, इसकी सच्चाई केवल वही जानती हैं। उनके पास इस मामले से जुड़े सबूत भी मौजूद हैं। उन्होंने नेताओं से अपील की है कि वे एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय इस मुद्दे पर राजनीति करना बंद करें।
महिला ने कहा है कि उन्हें एक दिन का समय दिया जाए। इसके बाद वह सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखेंगी और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाएंगी। अब सबकी निगाहें उनके अगले बयान पर टिकी हैं।
क्या है 23 साल पुराने विवाद की पूरी कहानी?
दरअसल, यह मामला वर्ष 2003 का है। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और एक वरिष्ठ नेता राज्य सरकार में राजस्व मंत्री थे।
इसी दौरान असम मूल की एक महिला ने नौकरी दिलाने का भरोसा देकर शारीरिक शोषण किए जाने और बच्चे के पितृत्व को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में काफी विवाद हुआ था।
सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट भी बना था चर्चा का विषय
आरोपों के बाद इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। संबंधित कांग्रेस नेता ने अपनी सफाई में दावा किया है कि वह सीबीआई जांच और डीएनए परीक्षण, दोनों में पाक-साफ साबित हुए थे।
नेता के मुताबिक, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने उस समय मंत्री पद से इस्तीफा भी दिया था। हालांकि, अब एक बार फिर इस पुराने मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सीएम धामी के बयान के बाद दोबारा गरमाया मामला
बीते 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था। मुख्यमंत्री के बयान के बाद करीब दो दशक पुराना यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।
इसके बाद कांग्रेस की ओर से भी पलटवार किया गया और पुराने प्रकरण को दोबारा उठाने के पीछे की मंशा पर सवाल खड़े किए गए।
महेंद्र भट्ट के सवाल पर कांग्रेस नेता का पलटवार
विवाद के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि असम मूल की महिला के बच्चे के पिता की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं हुई?
इस पर संबंधित कांग्रेस नेता ने जवाब देते हुए कहा कि उनका डीएनए टेस्ट पहले ही हो चुका है। साथ ही उन्होंने महेंद्र भट्ट का भी डीएनए टेस्ट कराने की मांग कर दी। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।
अब महिला के अगले बयान पर टिकी निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम में महिला का नया वीडियो सबसे अहम माना जा रहा है। महिला ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही सामने आकर अपनी बात रखेंगी और सबूतों के जरिए सच्चाई बताने का प्रयास करेंगी।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि महिला अपने अगले बयान में किन लोगों के नाम लेती हैं और कौन से दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक करती हैं। उन्होंने फिलहाल नेताओं पर उनके नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप ही लगाया है।
निष्कर्ष: उत्तराखंड का यह पुराना प्रकरण एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है। अब सबकी नजर महिला के अगले बयान पर है। यदि वह अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और ठोस सबूत सार्वजनिक करती हैं, तो प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ सकती है। फिलहाल महिला के कथित खुलासे का इंतजार है।


