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लिंग परीक्षण का दबाव न मानने पर गर्भवती पत्नी पर टूटा पति का कहर, बेरहमी से पिटाई के बाद गर्भस्थ शिशु की मौत

स्थान : विकासनगर (देहरादून), उत्तराखंड
तारीख : 11 जून 2026

आठ माह की गर्भवती महिला से मारपीट के आरोप में पति गिरफ्तार, पुलिस ने बढ़ाईं गंभीर धाराएं

विकासनगर/देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जनपद के सहसपुर क्षेत्र से घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। आरोप है कि आठ माह की गर्भवती महिला ने गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग परीक्षण कराने से इनकार किया तो पति ने गुस्से में उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। मारपीट के दौरान महिला के साथ इतनी क्रूरता की गई कि उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मामले में पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।


आठ माह की गर्भवती पत्नी को पीटने का आरोप

सहसपुर कोतवाली पुलिस के अनुसार, जस्सोवाला क्षेत्र निवासी महिला के साथ उसके पति बबलू ने कथित तौर पर मारपीट की। पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के दौरान आरोपी ने पत्नी को लात-घूंसों से पीटा और लकड़ी के फट्टे से भी हमला किया। आरोप है कि मारपीट के दौरान महिला के पेट पर भी चोट पहुंचाई गई, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की हालत गंभीर हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि पत्नी द्वारा लिंग परीक्षण कराने से इनकार किए जाने के बाद वह नाराज हो गया था और गुस्से में उसने उसके साथ मारपीट की।


पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा

इस मामले में पीड़िता के पिता शेर सिंह, निवासी ग्राम बालूवाला, ने सहसपुर कोतवाली में तहरीर देकर अपने दामाद के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया कि उनकी बेटी सीमा की शादी वर्ष 2020 में हरियाणा निवासी बबलू के साथ हुई थी। शादी के बाद सीमा ने दो बेटियों को जन्म दिया, जिसके बाद से ससुराल पक्ष उससे नाराज रहने लगा और उसका मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न किया जाने लगा।

परिजनों का आरोप है कि जब सीमा तीसरी बार गर्भवती हुई, तब आरोपी पति ने गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग परीक्षण कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। महिला द्वारा ऐसा करने से मना करने पर उसके साथ लगातार विवाद और प्रताड़ना बढ़ती गई।


मारपीट के साथ करंट लगाने का भी आरोप

तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि 8 जून को शेर सिंह को सूचना मिली कि उनकी बेटी के साथ उसके पति ने गंभीर मारपीट की है। आरोप है कि आरोपी ने उसे जान से मारने की नीयत से बिजली का करंट लगाने का प्रयास भी किया। घटना के बाद महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु की पुष्टि हुई।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की और आरोपी पति को हिरासत में लेकर पूछताछ की।


पूछताछ में आरोपी ने कबूला अपराध

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी बबलू ने बताया कि वह मूल रूप से गोहाना मोड़, पानीपत (हरियाणा) का रहने वाला है और प्रिंटिंग प्रेस का कार्य करता है। वह सप्ताहांत में ही सहसपुर स्थित अपने घर आता था। घटना वाले दिन पत्नी के साथ उसका विवाद हुआ, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर मारपीट की।

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने पत्नी को लकड़ी के फट्टे से पीटा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं।


पुलिस ने बढ़ाईं गंभीर धाराएं, आरोपी भेजा गया जेल

सहसपुर कोतवाली पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

कोतवाल प्रदीप सिंह रावत के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर मामले में पत्नी को गंभीर चोट पहुंचाने सहित अन्य प्रासंगिक धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


महिला उत्पीड़न और भ्रूण लिंग जांच जैसे अपराधों पर फिर उठे सवाल

यह घटना समाज में आज भी मौजूद लैंगिक भेदभाव और कन्या जन्म को लेकर संकीर्ण सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कानून द्वारा भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद इस तरह के मामलों का सामने आना चिंता का विषय है। साथ ही घरेलू हिंसा और महिलाओं के प्रति बढ़ती क्रूरता भी समाज और प्रशासन दोनों के लिए चुनौती बनी हुई है।


निष्कर्ष

देहरादून के सहसपुर क्षेत्र से सामने आया यह मामला न केवल घरेलू हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करता है, बल्कि बेटियों और गर्भ में पल रहे शिशुओं के प्रति समाज के एक वर्ग की नकारात्मक मानसिकता को भी उजागर करता है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने महिला सुरक्षा, भ्रूण लिंग परीक्षण पर रोक और सामाजिक जागरूकता को लेकर गंभीर चिंताएं एक बार फिर सामने ला दी हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कानून के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता है।

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