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उत्तराखंड में प्रतिबंधित कैप्सूल तस्करी नेटवर्क का खुलासा, मुजफ्फरनगर से हो रही थी सप्लाई, मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार

देहरादून | 20 जून 2026

उत्तराखंड में प्रतिबंधित दवाओं की अवैध तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित कैप्सूलों की सप्लाई करने का आरोप है।


जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी मुजफ्फरनगर स्थित श्री सिद्धबली फार्मा स्टोर का संचालक है और लंबे समय से प्रतिबंधित कैप्सूलों की खरीद-फरोख्त के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। आरोपी की पहचान सचिन मनिहाल के रूप में हुई है, जिसे साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद होने के बाद खुला मामला

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा 11 मई 2026 को हरिद्वार जिले के मंगलौर क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद हुआ। उस दौरान पुलिस ने 18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद किए थे। बरामदगी के बाद मंगलौर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।


विवेचना के दौरान जुटाए गए तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों से जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिले। जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित कैप्सूलों की बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उत्तराखंड भेजी जा रही थी और इस सप्लाई चेन का संचालन श्री सिद्धबली फार्मा स्टोर के माध्यम से किया जा रहा था।


कई गुना अधिक कीमत पर बेचे जा रहे थे कैप्सूल

एसटीएफ की जांच में यह भी पता चला कि आरोपी विभिन्न दवा कंपनियों से प्रतिबंधित कैप्सूल खरीदकर उन्हें हरिद्वार और देहरादून क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क के माध्यम से बेचता था। आरोप है कि वह इन कैप्सूलों को मूल कीमत से कई गुना अधिक दरों पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा था।


जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल छोटी स्तर की तस्करी नहीं थी, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित दवाओं की अवैध आपूर्ति की जा रही थी। इसके चलते युवाओं और आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।


पांच महीने में 35 लाख रुपये का लेन-देन

जांच के दौरान सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड ने एजेंसियों को और भी चौंका दिया। एसटीएफ को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे पता चलता है कि जनवरी 2026 से मई 2026 के बीच केवल एक दवा कंपनी से प्रतिबंधित कैप्सूल खरीदने के लिए करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।


अधिकारियों का कहना है कि यह रकम केवल एक कंपनी को किए गए भुगतान की है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे नेटवर्क का कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। जांच एजेंसियां अब अन्य दवा कंपनियों और सप्लाई चैनलों की भी पड़ताल कर रही हैं।


पूछताछ में आरोपी ने कबूला कारोबार

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी सचिन मनिहाल ने प्रतिबंधित कैप्सूलों की खरीद और उत्तराखंड में सप्लाई किए जाने की बात स्वीकार की है। इसके बाद उसे विधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।


गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसका इस्तेमाल कथित रूप से प्रतिबंधित दवाओं की खरीद, सप्लाई और नेटवर्क संचालन में किया जाता था। मोबाइल फोन से प्राप्त डाटा की भी जांच की जा रही है।


अवैध संपत्ति की जांच शुरू

एसटीएफ अब आरोपी की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि प्रतिबंधित दवाओं के इस अवैध कारोबार से आरोपी ने बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की है।


जांच एजेंसियां आरोपी के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, अचल संपत्तियों और अन्य निवेशों की जानकारी जुटा रही हैं। इसके अलावा नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक भी खंगाले जा रहे हैं ताकि सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।


निष्कर्ष

मंगलौर में 18 हजार प्रतिबंधित कैप्सूलों की बरामदगी से शुरू हुई जांच ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच सक्रिय एक बड़े अवैध दवा नेटवर्क का खुलासा किया है। मुजफ्फरनगर के मेडिकल स्टोर संचालक की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। यदि जांच में सामने आए वित्तीय और तकनीकी साक्ष्य सही साबित होते हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां तथा बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।


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