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देहरादून के निजी कॉलेज में तिलक और कलावा हटाने के आरोप पर विवाद, वीडियो वायरल; बजरंग दल ने किया प्रदर्शन

देहरादून | 29 जून 2026

राजधानी देहरादून के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक निजी कॉलेज में छात्रों के माथे पर लगे तिलक और हाथों में बंधे कलावे को हटाने के कथित निर्देश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शनिवार को बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज परिसर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। घटना को लेकर कॉलेज प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच तनाव का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि कॉलेज में प्रवेश के दौरान उन्हें माथे पर लगा तिलक और हाथ में बंधा कलावा हटाने के लिए कहा गया। छात्रों का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए धार्मिक प्रतीकों के साथ प्रवेश पर आपत्ति जताई और निर्देशों का पालन नहीं करने पर कॉलेज में प्रवेश नहीं देने की चेतावनी भी दी।


छात्रों के अनुसार, यह मामला केवल ड्रेस कोड तक सीमित नहीं था, बल्कि उनसे स्पष्ट रूप से तिलक और कलावा हटाने के लिए कहा गया। इसके बाद कुछ छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया।


घटना की सूचना मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि तिलक और कलावा सनातन धर्म की आस्था, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रतीक हैं तथा किसी भी शैक्षणिक संस्थान द्वारा इन पर रोक लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से इस मामले में स्पष्टीकरण देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने की मांग की।


प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि किसी भी छात्र को उसकी धार्मिक पहचान या आस्था के प्रतीकों के कारण परेशान किया जाता है, तो इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की भी मांग की।


वहीं, छात्रों के बीच भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ छात्रों ने कॉलेज के ड्रेस कोड का पालन किए जाने की बात कही, जबकि शिकायत करने वाले छात्रों का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों को हटाने के लिए बाध्य करना उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है।


समाचार लिखे जाने तक कॉलेज प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया था। वहीं स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से भी मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।


यह मामला सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित ड्रेस कोड के पालन की आवश्यकता पर भी जोर दे रहे हैं।


निष्कर्ष

देहरादून के निजी कॉलेज में तिलक और कलावा हटाने के कथित निर्देश को लेकर उत्पन्न विवाद ने धार्मिक आस्था और संस्थागत नियमों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल छात्रों के आरोप और विरोध प्रदर्शन के बाद मामला चर्चा में है। अब सभी की निगाहें कॉलेज प्रशासन के आधिकारिक पक्ष और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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