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उत्तराखंड विद्युत लोकपाल के दो बड़े फैसले: विवादित संपत्ति में किरायेदार को मिलेगा बिजली कनेक्शन, सोलर प्लांट रखरखाव पर भी स्पष्ट हुई जिम्मेदारी

देहरादून, उत्तराखंड | 4 जुलाई 2026

उत्तराखंड के विद्युत लोकपाल ने बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में अहम निर्णय सुनाते हुए बिजली कनेक्शन के अधिकार और रूफटॉप सोलर प्लांट के रखरखाव को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। एक फैसले में विवादित संपत्ति में रह रहे किरायेदार को बिजली कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया है, जबकि दूसरे मामले में स्पष्ट किया गया कि निजी परिसर में स्थापित रूफटॉप सोलर प्लांट के रखरखाव और उसके प्रदर्शन की जिम्मेदारी उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की नहीं होगी।


विवादित संपत्ति में रह रहे किरायेदार को भी मिलेगा बिजली कनेक्शन

हरिद्वार निवासी आशा अग्रवाल की अपील पर सुनवाई करते हुए विद्युत लोकपाल डी.पी. गैरोला ने यूपीसीएल को निर्देश दिया कि आवेदक से नियमानुसार तीन गुना सुरक्षा राशि लेकर 15 दिनों के भीतर नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।

मामले में यूपीसीएल ने नया बिजली कनेक्शन देने से इनकार कर दिया था। निगम का तर्क था कि संबंधित संपत्ति के स्वामित्व को लेकर ट्रस्ट और किरायेदार के बीच सिविल न्यायालय में विवाद लंबित है तथा किरायेदारी समझौते की अवधि भी समाप्त हो चुकी है।


विद्युत अधिनियम के तहत वास्तविक कब्जेदार का अधिकार सुरक्षित

लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 43 एवं 44 के अनुसार किसी भी परिसर का वास्तविक कब्जेदार बिजली आपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार रखता है।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित मामले में न्यायालय ने किरायेदार की बेदखली पर अंतरिम रोक लगा रखी है। ऐसे में आवेदक अभी भी परिसर की वैध कब्जेदार मानी जाएगी और केवल संपत्ति विवाद के आधार पर उसे बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं किया जा सकता।


तीन गुना सुरक्षा राशि लेकर देना होगा कनेक्शन

लोकपाल ने अपने आदेश में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के सप्लाई कोड रेगुलेशन-2020 का हवाला देते हुए कहा कि यदि आवेदक आवश्यक स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं है, तो ऐसी स्थिति में यूपीसीएल नियमानुसार तीन गुना सुरक्षा राशि जमा कराकर बिजली कनेक्शन जारी कर सकता है।

इस आदेश को विवादित संपत्तियों में निवास कर रहे अनेक किरायेदारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


रूफटॉप सोलर प्लांट के मामले में यूपीसीएल को मिली राहत

दूसरे मामले में टिहरी गढ़वाल निवासी सुंदर मणि डबराल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए विद्युत लोकपाल ने यूपीसीएल के पक्ष में फैसला सुनाया।

उपभोक्ता ने अपनी पत्नी के नाम पर तीन किलोवाट क्षमता का ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया था। उनका आरोप था कि प्लांट लगाने वाली फर्म की लापरवाही और खराब आफ्टर-सेल सर्विस के कारण इन्वर्टर लंबे समय तक खराब रहा, जिससे सोलर प्लांट अपेक्षित बिजली उत्पादन नहीं कर सका और उन्हें अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ा।

उन्होंने यूपीसीएल से बिजली बिल माफ करने अथवा संबंधित कंपनी से उसकी वसूली कराने की मांग की थी।


सोलर प्लांट की देखरेख उपभोक्ता की जिम्मेदारी

लोकपाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यूपीसीएल और उपभोक्ता के बीच हुए समझौते के क्लॉज 7.3 के अनुसार इंटरकनेक्शन पॉइंट से पहले स्थापित सोलर प्लांट के सुरक्षित संचालन, रखरखाव तथा खराबी को दूर कराने की पूरी जिम्मेदारी स्वयं उपभोक्ता की होती है।

लोकपाल ने कहा कि यूपीसीएल कानूनी रूप से इस बात के लिए जिम्मेदार नहीं है कि निजी परिसर में लगाया गया सोलर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से कार्य कर रहा है या नहीं।


फर्म और उपभोक्ता के बीच का है विवाद

अपने आदेश में लोकपाल ने कहा कि यदि सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनी ने सेवा में लापरवाही बरती है तो यह विवाद उपभोक्ता और संबंधित फर्म के बीच का विषय है। ऐसे मामलों में यूपीसीएल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इसी आधार पर अपील को खारिज करते हुए लोकपाल ने उपभोक्ता को नियमानुसार बकाया बिजली बिल का भुगतान करने के निर्देश दिए।


दोनों फैसलों से स्पष्ट हुए उपभोक्ताओं के अधिकार और जिम्मेदारियां

विद्युत लोकपाल के इन दोनों आदेशों से बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों और दायित्वों को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता सामने आई है। एक ओर वास्तविक कब्जेदार को बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं किए जाने का सिद्धांत मजबूत हुआ है, वहीं दूसरी ओर निजी सोलर प्लांट के रखरखाव की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से उपभोक्ता पर तय कर दी गई है।


निष्कर्ष

उत्तराखंड विद्युत लोकपाल के दोनों फैसले भविष्य में बिजली उपभोक्ताओं और यूपीसीएल से जुड़े विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकते हैं। विवादित संपत्ति में रह रहे वास्तविक कब्जेदार को बिजली कनेक्शन देने का निर्देश उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती देता है, जबकि रूफटॉप सोलर प्लांट संबंधी निर्णय यह स्पष्ट करता है कि निजी सौर ऊर्जा प्रणाली के रखरखाव और प्रदर्शन की जिम्मेदारी उपभोक्ता की ही होगी। इन आदेशों से बिजली सेवाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या सामने आई है।

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