BREAKING

ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत: बैटरी बंद करने वाले मोबाइल एप पर केंद्र सरकार की सख्ती, हटाने के दिए निर्देश

रुद्रपुर, उत्तराखंड | 4 जुलाई 2026

देशभर के लाखों ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के माध्यम से बंद करने में इस्तेमाल किए जा रहे तीन मोबाइल एप के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने संबंधित प्लेटफॉर्म को इन एप को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे एप सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं और इनके दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद हरकत में आई सरकार

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग बाइक या कार से चलते हुए ई-रिक्शा के पास पहुंचते हैं और मोबाइल एप के जरिए ब्लूटूथ से बैटरी से कनेक्ट होकर कुछ ही सेकंड में वाहन को बंद कर देते हैं।

इस दौरान अचानक बीच सड़क पर ई-रिक्शा रुक जाने से चालक और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में व्यस्त सड़कों पर इस तरह की घटनाएं दुर्घटना की आशंका भी बढ़ाती हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए।


बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा में मिली तकनीकी खामी

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या की मुख्य वजह कुछ ई-रिक्शा में लगे लिथियम-आयन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System-BMS) की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था है।

बताया जा रहा है कि कई बैटरियों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी। कहीं पासवर्ड नहीं लगाया गया था तो कहीं सुरक्षा प्रणाली बेहद कमजोर थी। इसी तकनीकी कमी का फायदा उठाकर मोबाइल एप बैटरी से कनेक्ट हो जाते थे और बैटरी की आउटपुट सप्लाई रोक देते थे, जिससे ई-रिक्शा की मोटर तुरंत बंद हो जाती थी।


ई-रिक्शा चालकों ने उठाई थी सख्त कार्रवाई की मांग

घटनाओं के वायरल होने के बाद देशभर के ई-रिक्शा चालकों और उनके संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। चालकों का कहना था कि इस तरह की घटनाएं न केवल उनकी आजीविका को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं।

कई संगठनों ने सरकार से ऐसे एप पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ बैटरी निर्माताओं के लिए भी मजबूत साइबर सुरक्षा मानक लागू करने की मांग की थी।


एसटीएफ ने शुरू की तकनीकी जांच

उत्तराखंड एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय कुमार ने बताया कि फिलहाल इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और सूचनाओं का गंभीरता से संज्ञान लिया गया है।

उन्होंने बताया कि तकनीकी टीम को सक्रिय कर दिया गया है। यह जांच की जा रही है कि संबंधित ई-रिक्शा की बैटरियां किन कंपनियों द्वारा निर्मित की गई हैं, उनमें सुरक्षा संबंधी क्या कमियां हैं और किन मोबाइल नंबरों अथवा ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से बैटरियों से अनधिकृत कनेक्शन स्थापित किया जा रहा है।

एसएसपी ने कहा कि यदि कोई पीड़ित औपचारिक शिकायत दर्ज कराता है तो उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


आईटी मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म को दिए एप हटाने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म को इन मोबाइल एप को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यक हुआ तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए।


इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा पर बढ़ा फोकस

इस पूरे घटनाक्रम ने इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों और उनकी बैटरियों में मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित ब्लूटूथ प्रोटोकॉल और अनधिकृत एक्सेस रोकने वाले सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही बैटरी निर्माताओं और वाहन कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।


निष्कर्ष

ई-रिक्शा की बैटरी को मोबाइल एप के जरिए बंद करने की घटनाओं पर केंद्र सरकार की सख्ती लाखों चालकों के लिए राहत भरा कदम मानी जा रही है। आईटी मंत्रालय द्वारा एप हटाने के निर्देश और जांच एजेंसियों की सक्रियता से इस तरह के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। अब जांच पूरी होने और सुरक्षा मानकों को और मजबूत किए जाने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा तथा सड़क पर चलने वाले यात्रियों और चालकों की सुरक्षा को और बेहतर बनाए जाने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *