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देवस्थानम बोर्ड पर त्रिवेंद्र रावत के बयान से सियासत तेज, देवप्रयाग में कांग्रेस का प्रदर्शन और पुतला दहन

टिहरी गढ़वाल (देवप्रयाग) | 12 जुलाई 2026

उत्तराखंड में चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा देवस्थानम बोर्ड के पुनर्गठन की वकालत किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को देवप्रयाग संगम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए त्रिवेंद्र रावत का पुतला फूंका और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि देवस्थानम बोर्ड को दोबारा लागू करने की कोशिश हुई तो पूरे प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री के बयान से गरमाई राजनीतिक बहस

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान बनाए गए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर अपनी राय स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि उनका मानना आज भी यही है कि प्रमुख मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए देवस्थानम बोर्ड जैसी व्यवस्था आवश्यक है। उनके अनुसार यदि बोर्ड प्रभावी रूप से कार्य कर रहा होता तो हाल के कुछ विवादों जैसी परिस्थितियां शायद उत्पन्न नहीं होतीं।

पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे धार्मिक परंपराओं तथा स्थानीय अधिकारों के खिलाफ बताया है।

देवप्रयाग संगम पर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

देवप्रयाग कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने देवप्रयाग संगम पर पुतला दहन कर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और देवस्थानम बोर्ड के पुनर्गठन के किसी भी प्रयास का विरोध जताया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चारधाम और अन्य प्राचीन मंदिरों का संचालन वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं तथा हक-हकूकधारियों की व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए।

जनभावनाओं के खिलाफ बताया देवस्थानम बोर्ड का प्रस्ताव

कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड का निर्णय पहले भी तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों, श्रद्धालुओं और प्रदेश की जनता के व्यापक विरोध के चलते वापस लेना पड़ा था। ऐसे में इसे दोबारा लागू करने की बात करना जनभावनाओं और उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं का सम्मान नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विषय को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मुद्दा मानती है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से परंपरागत पंडा-पुरोहित समाज और हक-हकूकधारियों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश के सिद्धपीठों और प्राचीन मंदिरों के प्रबंधन में किसी भी प्रकार का ऐसा बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे स्थानीय परंपराओं और अधिकारों पर प्रभाव पड़े।

कांग्रेस ने हाल के दिनों में मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे से जुड़े विभिन्न मामलों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह असवाल ने स्पष्ट कहा कि यदि राज्य सरकार भविष्य में देवस्थानम बोर्ड को दोबारा लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाती है तो कांग्रेस पूरे उत्तराखंड में लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर तीर्थ पुरोहितों, हक-हकूकधारियों और आम जनता के साथ मिलकर विरोध दर्ज कराएगी।

देवस्थानम बोर्ड फिर बना सियासी मुद्दा

चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड उत्तराखंड की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था से जुड़ा एक संवेदनशील विषय रहा है। पूर्व में इस बोर्ड के गठन के बाद तीर्थ पुरोहितों और विभिन्न संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसे वापस लेने का निर्णय लिया था। अब पूर्व मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

निष्कर्ष

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के देवस्थानम बोर्ड संबंधी बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां बोर्ड को बेहतर मंदिर प्रबंधन का माध्यम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और तीर्थ परंपराओं से जुड़े वर्ग इसे स्थानीय अधिकारों और धार्मिक व्यवस्थाओं के लिए चुनौती मान रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार के रुख और विपक्ष के विरोध के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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