देहरादून | 15 जुलाई 2026
हरेला पर्व के अवसर पर देहरादून नगर निगम इस वर्ष शहर को हरित बनाने के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने जा रहा है। नगर निगम ने 16 जुलाई को लगभग पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस बार केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की जीपीएस मैपिंग, ग्रीन रजिस्टर में पंजीकरण और नियमित देखभाल की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि पिछले वर्षों की तरह पौधे नष्ट न हों और उनकी निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके।
मिशन पोषण संकल्प के तहत सब्जी और सहजन के पौधों का भी वितरण
हरेला अभियान के साथ नगर निगम मिशन पोषण संकल्प के तहत भी व्यापक कार्यक्रम चलाएगा। इसके अंतर्गत लगभग चार से पांच लाख सब्जियों के पौधों का वितरण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जाएगा। प्रत्येक वार्ड में पार्षदों के समन्वय से इन पौधों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि घर-घर पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा मिल सके।
इसके अलावा विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन (मोरिंगा) के पौधे लगाए जाएंगे। सहजन को पोषण और स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है, इसलिए इसे मिशन पोषण संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
सार्वजनिक स्थलों पर चलेगा जनभागीदारी आधारित पौधारोपण अभियान
नगर निगम ने सार्वजनिक स्थलों, पार्कों, खाली सरकारी भूमि और चिन्हित हरित क्षेत्रों में जनसहभागिता के साथ विशेष पौधारोपण अभियान चलाने की योजना बनाई है। अभियान के दौरान लगभग 70 हजार फलदार, छायादार और चारा प्रजाति के पौधों का वितरण भी किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाया जा सके।
पिछले वर्ष सूख गए थे कई पौधे, इस बार निगरानी पर रहेगा विशेष जोर
पिछले वर्ष हरेला अभियान के दौरान कारगी ट्रांसफर स्टेशन, पनाश वैली, डांडा लाखोंड और हर्रावाला जोनल कार्यालय सहित कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया था। हालांकि बाद में हुए निरीक्षण में बड़ी संख्या में पौधे या तो सूख चुके थे या पूरी तरह गायब मिले थे।
इस स्थिति ने पौधारोपण अभियान की निगरानी और रखरखाव पर सवाल खड़े किए थे। नगर निगम अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल के लिए कोई समर्पित एजेंसी या कर्मचारी नियुक्त नहीं था, जिसके कारण अधिकांश पौधे जीवित नहीं रह सके।
इस बार लगाए जाएंगे फूलदार, सजावटी और छायादार वृक्ष
इस वर्ष नगर निगम ने पौधों के चयन में भी विविधता लाई है। अभियान के दौरान गुलमोहर, अमलतास, जैकरांडा और लेगरस्ट्रोमिया जैसे आकर्षक फूलदार एवं सजावटी पौधों के साथ-साथ पीपल, बरगद, पिलखन, अर्जुन, आम, जामुन और आंवला जैसे दीर्घायु एवं पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष लगाए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त सीमावर्ती और हरित आवरण कम वाले क्षेत्रों में बांस का रोपण भी किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ भूमि संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार हो सके।
वन विभाग इस अभियान के लिए सभी पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।
गढ़वाल राइफल्स के सहयोग से होगा विशेष वृक्षारोपण
नगर आयुक्त आलोक पांडे ने बताया कि शहर के विभिन्न पार्कों, अतिक्रमण मुक्त भूमि और सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नगर निगम, गढ़वाल राइफल्स के साथ समन्वय स्थापित कर अतिक्रमण मुक्त सरकारी भूमि पर भी विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाएगा। इन क्षेत्रों में लगाए जाने वाले पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि पौधारोपण का उद्देश्य सफल हो सके।
जीपीएस मैपिंग और ग्रीन रजिस्टर से होगी हर पौधे की निगरानी
इस बार नगर निगम ने पौधारोपण अभियान को तकनीक से जोड़ने का फैसला किया है। लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की जीपीएस मैपिंग की जाएगी और उसका विवरण ग्रीन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विशेषज्ञ पौधों की गुणवत्ता, उपलब्धता और संरक्षण की निगरानी करेंगे। इससे भविष्य में किसी भी पौधे की स्थिति का पता आसानी से लगाया जा सकेगा और नियमित देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।
निष्कर्ष
हरेला पर्व पर देहरादून नगर निगम का पांच लाख पौधों का महाअभियान केवल औपचारिक पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस बार पौधों के संरक्षण और उनकी दीर्घकालिक निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। जीपीएस मैपिंग, ग्रीन रजिस्टर और जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति जैसी व्यवस्थाओं के जरिए नगर निगम का लक्ष्य देहरादून को अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध शहर बनाना है। यदि पौधारोपण के साथ उनकी नियमित देखभाल भी सुनिश्चित होती है, तो यह अभियान राजधानी की हरियाली बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


