देहरादून | 14 जुलाई 2026
उत्तराखंड सरकार राज्य में ईको टूरिज्म को नई दिशा देने की तैयारी में है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत करने के उद्देश्य से नई ट्रेकिंग नीति जल्द लागू की जाएगी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में नई नीति का मसौदा शीघ्र तैयार कर अगले माह कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ईको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जाए तो पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए वनों को स्थानीय लोगों की आय का स्थायी स्रोत बनाना है।
नई ट्रेकिंग नीति के तहत राज्य में कई नई पर्वत चोटियों और ट्रेकिंग रूटों को पर्यटकों के लिए खोले जाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चिन्हित ट्रेकिंग स्थलों का पर्यावरणीय ऑडिट तेजी से पूरा कर अपनी रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मुख्य सचिव ने पर्यटन और वन विभाग को निर्देश दिए कि पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, वन विश्राम गृहों तथा अन्य पर्यटन स्थलों की बुकिंग व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन की जाए। ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से पर्यटकों की संख्या का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और किसी भी स्थल पर क्षमता से अधिक बुकिंग की समस्या समाप्त होगी। इससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
बैठक में जबरखेत मॉडल की तर्ज पर विकसित किए जा रहे राज्य के नौ प्रमुख ईको टूरिज्म स्थलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करते हुए अक्टूबर 2026 तक आम जनता के लिए खोल दिया जाए।
वन विश्राम गृहों, ट्रेकिंग के लिए चिन्हित 31 स्थलों, ईको कैंप और ईको हब के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी वन विभाग अथवा वन विकास निगम में से किसी एक संस्था को सौंपी जाए। इसके लिए एक माह के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही वन विकास निगम को और अधिक सशक्त बनाने के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए गए।
स्थानीय युवाओं को पर्यटन उद्योग से जोड़ने के लिए सरकार ने नेचर गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत स्थायी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे और केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें ईको टूरिज्म, ट्रेकिंग और वन्य पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सर्टिफिकेशन कोर्स का शुभारंभ अक्टूबर माह में वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर किया जाएगा। इससे प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों की उपलब्धता बढ़ेगी और राज्य में आने वाले पर्यटकों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित पर्यटन अनुभव उपलब्ध कराया जा सकेगा।
समीक्षा बैठक में सचिव वन सी. रविशंकर, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक नीना ग्रेवाल, मुख्य वन संरक्षक (ईको टूरिज्म) पी.के. पात्रो सहित वन एवं पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
नई ट्रेकिंग नीति और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की सरकार की पहल उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था, नए ट्रेकिंग रूट, ईको कैंप, प्रशिक्षित नेचर गाइड और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने जैसी योजनाएं राज्य में सतत पर्यटन को बढ़ावा देंगी। यदि ये योजनाएं निर्धारित समय पर लागू होती हैं, तो उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन के संतुलित मॉडल के रूप में देशभर में नई पहचान बना सकता है।


