रुद्रप्रयाग | 14 जुलाई 2026
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ग्रामीण मंडल में कई प्रमुख पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देकर पार्टी संगठन में हलचल मचा दी है। मंडल महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, सोशल मीडिया संयोजक सहित कई पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट को भेज दिए हैं। इस्तीफों के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और पार्टी नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुट गया है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही थी। हाल ही में आयोजित सोमनाथ भ्रमण कार्यक्रम के दौरान भी कई कार्यकर्ताओं को कार्यक्रमों और निर्णय प्रक्रिया से दूर रखे जाने को लेकर असंतोष था। अब इस्तीफों की प्रतियां सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने मंडल अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें लगातार संगठनात्मक गतिविधियों से अलग रखा गया, बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी गई तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी शामिल नहीं किया गया। उनका आरोप है कि वर्षों तक पार्टी के लिए समर्पण के साथ काम करने के बावजूद उनकी उपेक्षा की गई।
बीजेपी अगस्त्यमुनि ग्रामीण मंडल के उपाध्यक्ष भगवती प्रसाद सेमवाल ने कहा कि वर्षों तक निष्ठा के साथ पार्टी की सेवा करने के बावजूद उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया। उनका आरोप है कि कठिन परिस्थितियों में भी वे हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे, लेकिन अब उन्हें संगठन में महत्व नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि मंडल अध्यक्ष की ओर से न तो बैठकों की सूचना दी जाती है और न ही संगठन के कार्यक्रमों की जानकारी साझा की जाती है।
मंडल महामंत्री अजय जोशी ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल झंडे और डंडे उठाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे संगठन के भीतर निराशा का माहौल बन गया है।
सोशल मीडिया संयोजक विनोद कुमार और कार्यकर्ता योगेश सेमवाल ने भी आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी की बैठकों, अभियानों और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की सूचना तक नहीं दी जाती। उनका कहना है कि संगठन में कुछ चुनिंदा लोगों को ही प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि सक्रिय कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया है।
इस्तीफा देने वाले सभी पदाधिकारियों ने जिला नेतृत्व से पूरे मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलेगी तो ऐसे माहौल में संगठन के लिए काम करना कठिन हो जाएगा। उन्होंने संगठन में पारदर्शिता और सभी कार्यकर्ताओं को समान अवसर देने की मांग भी उठाई है।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भी बीजेपी पर हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष चल रहा था, जो अब सार्वजनिक हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व मामले को दबाने या इस्तीफों की गंभीरता को कम करके दिखाने का प्रयास कर सकता है।
वहीं, रुद्रप्रयाग बीजेपी जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट ने कहा कि इस्तीफा देने वाले सभी कार्यकर्ताओं से बातचीत की जा रही है। उनकी नाराजगी के कारणों को समझा जा रहा है और संगठन हर स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी संवाद के माध्यम से स्थिति सामान्य हो जाएगी।
हालांकि, जिन आरोपों के आधार पर इस्तीफे दिए गए हैं, उन पर अगस्त्यमुनि ग्रामीण मंडल अध्यक्ष की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष
रुद्रप्रयाग बीजेपी में एक साथ कई पदाधिकारियों के इस्तीफों ने संगठन के भीतर चल रहे असंतोष को सार्वजनिक कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले सामने आई यह नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व बातचीत के जरिए असंतुष्ट नेताओं को मनाने में कितना सफल होता है या यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक रूप लेता है।






