स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 24 अगस्त 2026
उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में चल रही परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नाराजगी जताई है। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने प्रदेश की प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को काम में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं से जुड़े काम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। साथ ही सभी संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
15 दिन में मांगी गई प्रगति रिपोर्ट
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों से परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, स्वीकृतियों, भूमि संबंधी मामलों और निर्माण कार्य की गति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि केवल कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति जमीन पर नजर आनी चाहिए।
उन्होंने संबंधित जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में प्रस्तावित और निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यदायी संस्थाओं और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, विभागीय अनुमति या अन्य किसी स्तर पर अड़चन है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्थाएं आपसी समन्वय से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करें।
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे पर विशेष जोर
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड, उत्तराखंड मेट्रो रेल, शहरी अवस्थापना एवं भवन निर्माण निगम तथा पर्यटन विभाग से जुड़ी विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
एनएचएलएमएल के पहले चरण की 11 और दूसरे चरण में प्रस्तावित 6 रोपवे परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
केदारनाथ रोपवे परियोजना की प्रस्तावित लंबाई 12.90 किलोमीटर, जबकि हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना की लंबाई 12.40 किलोमीटर बताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम होगी और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी।
नैनीताल और मसूरी रोपवे से यातायात दबाव कम करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने नैनीताल रोपवे परियोजना से संबंधित कार्रवाई में भी तेजी लाने को कहा। उन्होंने कहा कि नैनीताल उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और पर्यटन सीजन के दौरान यहां यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में रोपवे पर्यटकों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना की भी बैठक में विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान लगातार बढ़ने वाला ट्रैफिक बड़ी चुनौती बनता है। रोपवे के विकसित होने से पर्यटकों को सुगम परिवहन विकल्प मिलेगा और मसूरी की ओर जाने वाली सड़कों पर यातायात का दबाव कम किया जा सकेगा।
यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी परियोजनाओं पर भी नजर
समीक्षा बैठक में यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी समेत अन्य प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं से जुड़ी लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए।
भूमि अधिग्रहण, वन भूमि या अन्य विभागीय स्वीकृतियों से जुड़े मामलों में जिलाधिकारियों को प्रभावी समन्वय स्थापित कर समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी से परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे और नीलकंठ परियोजना पर भी चर्चा
बैठक में हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना और त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे से जुड़े प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी देने वाली परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि रोपवे परियोजनाओं के निर्माण में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की यातायात एवं पर्यटन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन किया जाए।
रेल, रोड और रोपवे सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए रेल, सड़क और रोपवे तीनों ही कनेक्टिविटी के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सड़क क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और चारधाम ऑल वेदर रोड सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के माध्यम से राज्य की कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि रेल क्षेत्र में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ वंदे भारत जैसी सेवाओं के माध्यम से उत्तराखंड को बड़े शहरों से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। इसी क्रम में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए रोपवे कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंचेगा रोपवे नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रोपवे कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा रहा है और उत्तराखंड भी इसमें तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में नीलकंठ, हेमकुंड साहिब, केदारनाथ, मसूरी, औली और यमुनोत्री धाम के लिए रोपवे परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा काठगोदाम से नैनीताल तक रोपवे कनेक्टिविटी और अन्य संभावित विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लोगों और पर्यटकों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकता है। धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान होने के साथ पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही सुगम होगी।
रोपवे परियोजनाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने और यात्रा के समय को घटाने में भी इन परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
9 नवंबर तक काम दिखाने का अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट संदेश दिया कि रोपवे परियोजनाओं की प्रगति अब केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने 9 नवंबर, राज्य स्थापना दिवस तक इन परियोजनाओं में ठोस प्रगति धरातल पर दिखाई देने की अपेक्षा जताई।
कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन के भीतर मुख्य सचिव को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री स्वयं इन परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा करेंगे।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में धार्मिक और पर्यटन स्थलों को आधुनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए रोपवे परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री, मसूरी और नैनीताल जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं की गति बढ़ाने के मुख्यमंत्री के निर्देश से अब संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं पर समयसीमा में काम पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में 15 दिन की प्रगति रिपोर्ट और 9 नवंबर तक धरातल पर दिखने वाले कार्य यह तय करेंगे कि इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की रफ्तार वास्तव में कितनी तेज होती है।


