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SIR पर उत्तराखंड में सियासी संग्राम तेज, भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया राष्ट्र विरोधी राजनीति का आरोप; कांग्रेस ने भी किया पलटवार

स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 24 अगस्त 2026

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया के बीच भाजपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर SIR के विरोध के बहाने राष्ट्र विरोधी ताकतों के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया है, तो कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा पर समाज को बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते कांग्रेस अब राष्ट्र विरोध की राजनीति की ओर बढ़ रही है। वहीं कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों के पक्ष में नहीं है, लेकिन जिन नागरिकों के मताधिकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उनके अधिकारों की आवाज उठाना उसका लोकतांत्रिक दायित्व है।

भाजपा ने कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कांग्रेस पर विपक्ष की भूमिका से आगे बढ़कर ऐसी ताकतों के साथ खड़े होने का आरोप लगाया, जिन्हें भाजपा राष्ट्रहित के खिलाफ मानती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार विरोध करते हुए कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व अब राष्ट्र विरोधी राजनीति की दिशा में जा रहा है।

नरेश बंसल ने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में माओवादी और नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। उनके अनुसार, केवल हथियारबंद नक्सलवाद से मुकाबला करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन वैचारिक ताकतों का भी सामना करना जरूरी है जो देश को भीतर से कमजोर करने का प्रयास करती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं से उनकी राजनीतिक सोच सामने आती है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देशहित से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष को जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।

SIR को लेकर भाजपा ने बताई अपनी दलील

SIR के मुद्दे पर नरेश बंसल ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण किसी एक वर्ग या राजनीतिक दल के हित में नहीं किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का गठन मतदाताओं के माध्यम से होता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में मौजूद रहे और अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।

भाजपा सांसद ने दावा किया कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी इसका इस्तेमाल मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए किया जाता रहा है। उनके मुताबिक, निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

कांग्रेस पर वर्ग विशेष की राजनीति का आरोप

नरेश बंसल ने कांग्रेस पर राजनीतिक और वर्ग विशेष के हितों को साधने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी SIR का विरोध करती है तो कभी वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय विषयों को लेकर आपत्ति जताती है।

भाजपा नेता के अनुसार, कांग्रेस के ऐसे रुख से उसकी राजनीतिक मानसिकता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि जनता को यह समझना होगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रहित को मजबूत करने के लिए कौन राजनीतिक दल किस दिशा में काम कर रहा है।

कांग्रेस ने भाजपा पर किया पलटवार

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने भाजपा पर ओछी राजनीति करने और समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटकर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।

प्रतिमा सिंह ने कहा कि कांग्रेस किसी भी ऐसे व्यक्ति के साथ खड़ी नहीं है, जो देश या प्रदेश में अवैध रूप से रह रहा हो। उनका कहना है कि अवैध घुसपैठ या कानून के उल्लंघन का कांग्रेस समर्थन नहीं करती।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी पात्र नागरिक के मताधिकार पर संकट आता है या उसका नाम मतदाता सूची से हटने की स्थिति बनती है, तो कांग्रेस ऐसे लोगों के अधिकारों की आवाज जरूर उठाएगी।

कांग्रेस ने भाजपा से पूछा सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश और प्रदेश में अब भी अवैध रूप से रहने वाले लोगों की मौजूदगी है, तो लंबे समय से सत्ता में रहने के दौरान भाजपा ने इस दिशा में क्या कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सरोकार प्रदेश की जनता से है और पार्टी संविधान, लोकतंत्र तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी।

प्रतिमा सिंह के मुताबिक, SIR की प्रक्रिया में यदि किसी पात्र नागरिक के सामने दस्तावेज या अन्य कारणों से मताधिकार प्रभावित होने की स्थिति पैदा होती है, तो उसके अधिकारों की रक्षा करना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

SIR बना उत्तराखंड में नया राजनीतिक मुद्दा

उत्तराखंड में SIR को लेकर चल रही यह राजनीतिक बहस अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गई है। भाजपा इसे मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बता रही है, जबकि कांग्रेस पात्र मतदाताओं के अधिकार और प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रही है।

दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। खासतौर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े दावों, आपत्तियों और दस्तावेजी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में SIR अब प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। भाजपा जहां इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाली पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने की कवायद बता रही है, वहीं कांग्रेस का जोर पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा पर है। दोनों दलों के बीच राष्ट्रहित, घुसपैठ, मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर तीखी बयानबाजी जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR की आगे की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक आरोपों के बीच प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची को लेकर क्या तस्वीर सामने आती है।

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