देहरादून, 11 सितंबर 2026
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की बहुचर्चित वीपीडीओ परीक्षा-2016 धांधली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच के तहत ईडी की टीम ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व निजी सहायक (पीए) चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास पर छापा मारा। तलाशी के दौरान ईडी ने 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, 200 ग्राम से अधिक सोना और 12 लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद करने का दावा किया है।
रायपुर-तपोवन रोड स्थित घर पर हुई कार्रवाई
ईडी की टीम ने गुरुवार को चंदन सिंह जीना के रायपुर-तपोवन रोड स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अनुसार, यहां से करीब 32 लाख रुपये की बेहिसाबी भारतीय मुद्रा मिली। इसके साथ ही लगभग 200.5 ग्राम वजन के सोने के सिक्के और चेन भी बरामद किए गए।
बरामद सोने में 13 सोने के सिक्के और सात सोने की चेन शामिल बताई गई हैं। ईडी ने जीना का मोबाइल फोन भी कब्जे में लेकर उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
रोलेक्स से लेकर राडो तक, 12 लग्जरी घड़ियां मिलीं
तलाशी के दौरान ईडी को 12 महंगी कलाई घड़ियां भी मिली हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, बरामद घड़ियों में रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसॉट और कैसियो एडिफाइस जैसे ब्रांड शामिल हैं।
ईडी ने बरामद संपत्तियों और नकदी के साथ-साथ जीना तथा उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों की भी जांच की। जांच में इन खातों में करीब 52.16 लाख रुपये का बैलेंस सामने आया, जिसे ईडी ने फ्रीज करा दिया है।
कुल संपत्ति की कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई
ईडी की कार्रवाई में बरामद नकदी, सोने, घड़ियों और बैंक खातों में मिले बैलेंस को मिलाकर जब्त या फ्रीज की गई संपत्ति की कुल कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है। एजेंसी अब इस संपत्ति के स्रोत और परीक्षा धांधली से इसके संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
ईडी की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरीके से किया गया।
वीपीडीओ परीक्षा-2016 से जुड़ा है पूरा मामला
वीपीडीओ परीक्षा-2016 में कथित धांधली की जांच की शुरुआत विजिलेंस ने की थी। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2023 में जांच उत्तराखंड एसटीएफ को सौंप दी गई।
एसटीएफ ने जांच आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएस रावत, सचिव आरएस कन्याल और परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
पुलिस जांच के बाद ईडी ने शुरू की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
एसटीएफ की प्राथमिकी और पुलिस जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने भी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। इसी क्रम में गुरुवार को ईडी ने कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
जांच एजेंसी की टीमें तत्कालीन आयोग अधिकारियों और परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी से जुड़े लोगों के परिसरों तक पहुंचीं। इन कार्रवाइयों के दौरान सामने आए कथित मनी ट्रेल को आगे बढ़ाते हुए ईडी की टीम चंदन सिंह जीना के आवास तक पहुंची।
ईडी की जांच में यह पहलू सामने आया कि जीना की कथित तौर पर परीक्षा धांधली से जुड़ी रकम के इस्तेमाल में भूमिका रही हो सकती है। इसी आधार पर उनके घर और वित्तीय लेनदेन की जांच की गई।
हरीश रावत के कार्यकाल में ओएसडी भी रहे थे जीना
चंदन सिंह जीना पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी सहयोगियों में रहे हैं। वह वर्ष 2014 से 2017 तक हरीश रावत के ओएसडी के रूप में भी काम कर चुके हैं। अब वीपीडीओ परीक्षा धांधली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनका नाम ईडी की जांच के दायरे में आया है।
हालांकि, ईडी की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि बरामद संपत्ति और बैंक खातों में मौजूद रकम का कथित परीक्षा घोटाले से क्या सीधा संबंध है।
निष्कर्ष
वीपीडीओ परीक्षा-2016 की धांधली से शुरू हुई जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू तक पहुंच गई है। ईडी की ताजा कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, महंगी घड़ियां और बैंक खातों में जमा रकम सामने आने के बाद जांच और तेज होने की संभावना है। अब एजेंसी बरामद संपत्ति के स्रोत, वित्तीय लेनदेन और कथित परीक्षा धांधली से जुड़े मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है। मामले में आगे होने वाली जांच और कार्रवाई से कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।


