देहरादून, 11 सितंबर 2026
राजधानी देहरादून में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, देहरादून ने प्रेमनगर थाने के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक नरेश राठौर समेत पांच पुलिसकर्मियों और यशपाल तंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की जांच सीओ स्तर के अधिकारी से कराने को कहा है।
यह आदेश प्रवीण सेमवाल और उनकी पत्नी प्रतीक्षा सेमवाल की ओर से दाखिल धारा 175(3) बीएनएसएस के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया। दंपति ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट, धमकी देने और थाने में प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
निजी वाहन से घर पहुंचे पुलिसकर्मी, थाने ले जाने का आरोप
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता संजीव कुमार के अनुसार, 9 अप्रैल 2026 को कुछ पुलिसकर्मी निजी वाहन से प्रवीण सेमवाल और उनकी पत्नी प्रतीक्षा के पास पहुंचे थे। आरोप है कि दोनों को जबरन प्रेमनगर थाने ले जाया गया।
दंपति का कहना है कि थाने ले जाते समय उन्हें एनकाउंटर की धमकी दी गई। इसके बाद थाने में प्रवीण के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। पत्नी प्रतीक्षा ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है।
गर्भवती महिला से मारपीट का आरोप, मेडिकल दस्तावेज कोर्ट में पेश
पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना के समय प्रतीक्षा गर्भवती थीं। आरोप है कि मारपीट के बाद उन्हें ब्लीडिंग हुई। दंपति की ओर से इस दावे के समर्थन में मेडिकल दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए।
इसके अलावा पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि थाने में दबाव बनाकर यशपाल तंवर को 20 लाख रुपये देने का लिखित समझौता भी कराया गया था। अदालत के समक्ष इन आरोपों से जुड़े दस्तावेज भी रखे गए।
चार साल का बच्चा घर पर अकेला होने की बात कही, फिर भी नहीं जाने दिया
अधिवक्ता के मुताबिक प्रवीण और प्रतीक्षा को 9 से 10 अप्रैल तक थाने में रखने का आरोप है। दंपति ने पुलिस को बताया था कि उनका चार साल का बच्चा घर पर अकेला है।
प्रतीक्षा ने बच्चे को दूध पिलाने के लिए घर जाने की अनुमति मांगी, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी बात नहीं मानी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस दौरान दंपति को थाने में ही रखा गया।
पुलिसकर्मियों से मारपीट का केस दर्ज कर गिरफ्तारी का आरोप
पीड़ित पक्ष के अनुसार, बाद में पुलिस ने प्रवीण और प्रतीक्षा के खिलाफ पुलिसकर्मियों से मारपीट, वर्दी फाड़ने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
दंपति ने इस मुकदमे को गलत और फर्जी बताया। अधिवक्ता के अनुसार, जमानत पर सुनवाई के दौरान मेडिकल दस्तावेज और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए, जिसके बाद दोनों को उसी दिन जमानत मिल गई।
पुलिस ने कोर्ट में आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर पुलिस ने अदालत में दाखिल अपनी रिपोर्ट में दंपति की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत और निराधार बताया है।
पुलिस के मुताबिक प्रतीक्षा सेमवाल और आकाश बंगवाल थाने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां महिला उपनिरीक्षक के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। पुलिस ने महिला उपनिरीक्षक की वर्दी फाड़ने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का भी आरोप लगाया।
पुलिस ने थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि फुटेज में प्रतीक्षा और आकाश को थाने में शोर-शराबा करते हुए देखा गया।
अदालत ने माना- निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, पुलिस की रिपोर्ट और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने मामले के आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए स्वतंत्र और प्रभावी जांच को जरूरी माना।
चूंकि आरोप तत्कालीन प्रेमनगर थाना प्रभारी जैसे निरीक्षक स्तर के अधिकारी के खिलाफ भी लगाए गए हैं, इसलिए अदालत ने उनके अधीनस्थ स्तर से अलग अधिकारी द्वारा जांच कराने का निर्देश दिया। मामले की जांच सीओ स्तर के अधिकारी से कराए जाने को कहा गया है।
अदालत के आदेश के बाद तत्कालीन प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर, जो वर्तमान में पटेल नगर थाने के प्रभारी बताए जा रहे हैं, समेत पांच पुलिसकर्मियों और यशपाल तंवर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
पीड़ित ने की सीबीसीआईडी जांच की मांग
अदालत के आदेश के बाद प्रवीण सेमवाल ने कहा कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उनका आरोप है कि उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने कई बार शिकायत रखी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
अब प्रवीण सेमवाल ने मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सकेगी।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता संजीव कुमार ने कहा कि अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को गंभीरता से लिया है। उनका प्रयास रहेगा कि मामले की जांच सिविल पुलिस के बजाय सीबीसीआईडी से कराई जाए।
पुलिस का पक्ष- आदेश के बाद जांच आगे बढ़ाई जाएगी
एसपी सिटी देहरादून प्रमोद कुमार के मुताबिक अदालत के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद सीओ स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
निष्कर्ष
प्रेमनगर थाने से जुड़े इस मामले में अदालत के आदेश के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। एक तरफ दंपति ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए थाने में अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का पक्ष रखा है। अब अदालत के निर्देश पर होने वाली स्वतंत्र जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।


