देहरादून/अल्मोड़ा, 11 सितंबर 2026
उत्तराखंड में शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर प्रदेशभर में बैंक कर्मचारियों ने कामकाज बंद रखा और अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण बैंकों में नियमित कामकाज प्रभावित रहा और जरूरी बैंकिंग कार्यों के लिए पहुंचे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारियों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए सरकार से लंबे समय से लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि कई मुद्दों को लेकर लंबे समय से वार्ता और आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
देहरादून में सेंट्रल बैंक के बाहर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
देहरादून में बैंक कर्मचारी एश्ले हॉल चौक स्थित सेंट्रल बैंक के सामने एकत्र हुए। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की आवाज उठाई।
कर्मचारियों का कहना था कि वे आंदोलन और हड़ताल के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से मांगों के लंबित रहने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के संयोजक और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की देहरादून इकाई के ऑर्गेनाइजिंग जनरल सेक्रेटरी इंदर रावत ने बताया कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग वर्ष 2012 से उठाई जा रही है।
2015 में मिली थी दो शनिवार की छुट्टी, बाकी शनिवार का इंतजार
बैंक कर्मचारियों के अनुसार वर्ष 2015 में महीने के दो शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था। इसके बाद सभी शनिवार को बैंक बंद रखने की व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक फाइव-डे बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम के बढ़ते दबाव के बीच पांच दिन का कार्य सप्ताह कर्मचारियों के लिए जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
पीएलआई योजना वापस लेने की मांग
अल्मोड़ा में प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मचारियों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना को लेकर भी नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा पीएलआई व्यवस्था एकतरफा और भेदभावपूर्ण है।
उन्होंने इस योजना को वापस लेने या इसमें मौजूद विसंगतियों को दूर करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन और प्रोत्साहन से जुड़े फैसले कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए।
वेतन समझौते के लंबित प्रावधान लागू करने की मांग
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने 11वें और 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते से जुड़े लंबित प्रावधानों को लागू करने की मांग भी उठाई।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था तत्काल लागू करने, पेंशन अपडेट करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उनका कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और अब इनके समाधान के लिए ठोस निर्णय लिया जाना जरूरी है।
बैंक बंद मिलने से ग्राहकों को हुई परेशानी
एक दिवसीय हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। शुक्रवार को जमा-निकासी, चेक से जुड़े कार्य, बैंक खातों से संबंधित जरूरी प्रक्रियाओं समेत कई सेवाएं बाधित हुईं।
कई ग्राहक जरूरी बैंकिंग काम के लिए शाखाओं तक पहुंचे, लेकिन बैंक बंद होने के कारण उन्हें बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। कुछ लोगों को बैंक पहुंचने के बाद हड़ताल की जानकारी मिली।
हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण बैंकिंग सेवाओं पर लगातार तीन दिन का असर पड़ा। ऐसे में ग्राहकों को अपने कई जरूरी कामों के लिए सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। सोमवार को बैंक खुलने के बाद नियमित सेवाएं बहाल होने की उम्मीद है।
मांगें नहीं मानी तो सितंबर में तीन दिन की हड़ताल
बैंक कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार की हड़ताल को चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए। कर्मचारियों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
कर्मचारियों का कहना है कि इसके बाद भी यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से व्यापक आंदोलन और हड़ताल शुरू की जाएगी।
सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील
बैंक कर्मचारियों ने सरकार से फाइव-डे बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, पीएलआई से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने, लंबित वेतन समझौते लागू करने और पेंशन से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी जरूरी है। कर्मचारियों का दावा है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते फैसला लिया जाता है तो आगे होने वाले बड़े आंदोलन को टाला जा सकता है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में एक दिवसीय बैंक हड़ताल ने जहां कर्मचारियों की लंबित मांगों को एक बार फिर सामने ला दिया, वहीं इसका सीधा असर बैंक ग्राहकों पर भी पड़ा। फाइव-डे बैंकिंग, पीएलआई, पेंशन और वेतन समझौते से जुड़े मुद्दों पर सरकार के अगले कदम पर कर्मचारियों की नजर है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सितंबर के अंत में प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल और अक्टूबर में व्यापक आंदोलन से बैंकिंग सेवाओं पर और बड़ा असर पड़ सकता है।



