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धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: इंटर्न डॉक्टरों का बढ़ेगा स्टाइपेंड, खिलाड़ियों के लिए 283 पद आरक्षित

देहरादून, 11 सितंबर 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद मंजूरी दी गई। बैठक में सबसे अहम फैसला राजकीय मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस और पीजी इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर लिया गया। पिछले कई दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टर आंदोलन कर रहे थे। सरकार के फैसले के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट में खेल, स्वास्थ्य और भूमि से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। हालांकि राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए तीन साल की अनिवार्य सेवा से जुड़ा प्रस्ताव इस बैठक में मंजूर नहीं हो सका।

इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को मिली मंजूरी

राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई कर रहे इंटर्न डॉक्टर पिछले कई दिनों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। डॉक्टरों की मांग को देखते हुए शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।

मंत्रिमंडल ने इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार के इस निर्णय को आंदोलन कर रहे मेडिकल इंटर्न के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

स्टाइपेंड में बढ़ोतरी से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को आर्थिक रूप से राहत मिलने की उम्मीद है।

एमबीबीएस के बाद तीन साल सेवा वाला प्रस्ताव अभी लंबित

स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों की सेवा अवधि को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके पीछे सरकार की मंशा पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना है।

दरअसल, राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पर्वतीय क्षेत्रों में बॉन्ड के तहत सेवाएं देनी होती हैं। लेकिन कई मामलों में डॉक्टर कुछ समय ड्यूटी करने के बाद पीजी में प्रवेश के लिए आवेदन कर देते हैं और आगे की पढ़ाई के लिए चले जाते हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।

प्रस्ताव में व्यवस्था की जानी थी कि राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को कम से कम तीन साल तक सेवा देना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही उन्हें पीजी की पढ़ाई के लिए अनुमति मिलेगी।

हालांकि यह प्रस्ताव इस बार की कैबिनेट बैठक में मंजूर नहीं हुआ।

खेल नीति के तहत खिलाड़ियों के लिए 283 पद आरक्षित

कैबिनेट ने खेल नीति 2021 के तहत खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने से जुड़ा अहम फैसला लिया है। विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों के लिए कुल 283 पद आरक्षित किए गए हैं।

इन पदों पर खिलाड़ियों को खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग और वन विभाग समेत विभिन्न विभागों में नियुक्ति का अवसर मिलेगा।

सरकार के इस फैसले से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी के अवसर मिलने का रास्ता साफ होगा।

गढ़वाल सभा को जीएमवीएन की जमीन देने को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में गढ़वाल सभा से जुड़े भूमि प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत जीएमवीएन की पार्किंग में स्थित करीब 972 गज भूमि गढ़वाल सभा को दिए जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने सहमति जताई।

इस फैसले से संबंधित संस्था को अपनी गतिविधियों के लिए भूमि उपलब्ध होने का रास्ता साफ होगा।

ईएसआई अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि पर फैसला

मंत्रिमंडल ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ईएसआई से जुड़े भूमि प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। हरिद्वार में कर्मचारी राज्य बीमा निगम निदेशालय की जमीन के नजदीक करीब 15 एकड़ भूमि ईएसआई अस्पताल के लिए दिए जाने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी।

इससे क्षेत्र में ईएसआई से जुड़े स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।

मानसून सत्र की तारीख पर इस बैठक में फैसला नहीं

कैबिनेट बैठक से पहले विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख और स्थान को लेकर भी चर्चा की उम्मीद थी। हालांकि शुक्रवार की बैठक में इस विषय पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया।

अब मानसून सत्र को लेकर सरकार की अगली बैठक या संबंधित स्तर पर होने वाले निर्णय का इंतजार रहेगा।

निष्कर्ष

धामी कैबिनेट की शुक्रवार को हुई बैठक में स्वास्थ्य, खेल और भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को मंजूरी मिलना लंबे समय से आंदोलन कर रहे मेडिकल छात्रों के लिए राहत की खबर है। वहीं खिलाड़ियों के लिए 283 सरकारी पद आरक्षित करने और ईएसआई अस्पताल के लिए 15 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के फैसले भी अहम माने जा रहे हैं। दूसरी ओर एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए तीन साल की अनिवार्य सेवा का प्रस्ताव अभी लंबित है, जिस पर आगे फैसला लिया जा सकता है।

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