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स्वतंत्रता सेनानी कोटे के फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच तेज, SIT ने पटवारियों से पूछताछ कर खंगाले राजस्व रिकॉर्ड

देहरादून | 19 सितंबर 2026

देहरादून: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS में दाखिले के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के मामले में अब विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच तेज कर दी है। पांच सदस्यीय SIT का गठन होने के बाद टीम ने देहरादून के SDM कार्यालय पहुंचकर राजस्व विभाग से जुड़े पटवारियों से पूछताछ की। इस दौरान संबंधित अभिलेखों की भी जांच की गई। अधिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे और एससी-एसटी कोटे से जुड़ी फाइलों को अलग-अलग तैयार कर SIT को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

एसपी देहात जया बलूनी को बनाया गया SIT प्रभारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात जया बलूनी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम बनाई गई है। टीम में सीओ डोईवाला वंदना वर्मा, सीओ सदर अंकित कंडारी के साथ क्लेमेनटाउन और रायपुर थाना प्रभारी को शामिल किया गया है।

अब रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में दर्ज दोनों मुकदमों की जांच SIT की निगरानी में आगे बढ़ेगी। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्ध प्रमाणपत्र तैयार होने से लेकर उनके सत्यापन और MBBS दाखिले में इस्तेमाल होने तक पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई।

SDM कार्यालय में पटवारियों से पूछताछ

SIT प्रभारी जया बलूनी के नेतृत्व में टीम ने SDM कार्यालय में राजस्व विभाग के पटवारियों से पूछताछ की। इस दौरान SDM अपूर्वा सिंह भी मौजूद रहीं। टीम ने संबंधित अभिलेखों और प्रमाणपत्रों से जुड़े रिकॉर्ड को देखा।

SIT ने उन पटवारियों से भी जानकारी ली, जिनके क्षेत्र से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड अथवा प्रमाणपत्र जुड़े हुए हैं। पूछताछ में प्रमाणपत्र के लिए किए गए आवेदन, स्थानीय स्तर पर हुए सत्यापन, राजस्व रिपोर्ट और प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जुटाई गई।

SDM कार्यालय से संबंधित फाइलें जल्द SIT को सौंपने की तैयारी है।

दो थानों में दर्ज हैं अलग-अलग मुकदमे

प्रमाणपत्रों की शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं। क्लेमेनटाउन थाने में दर्ज मामले में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी को आरोपी बनाया गया है। वहीं रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।

इस तरह दोनों मुकदमों में कुल पांच महिलाओं को आरोपी बनाया गया है। पुलिस और SIT अब दस्तावेजों, आधार कार्ड, आवेदन पत्र, प्रमाणपत्र और राजस्व अभिलेखों का आपस में मिलान कर रही है।

चार अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में एक ही स्वतंत्रता सेनानी का परिचय पत्र

NEET-UG 2026 की काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की नौ MBBS सीटों को लेकर प्रमाणपत्रों पर सवाल उठे थे। शुरुआती शिकायत में सात प्रमाणपत्रों को लेकर संदेह जताया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच कराई।

जांच में चार अभ्यर्थियों परी, खुशी, स्वाति और तृप्ति के दस्तावेजों में एक ही व्यक्ति के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र इस्तेमाल होने की बात सामने आई। इन दस्तावेजों में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का नाम दर्ज था। हालांकि संबंधित रिकॉर्ड में इस नाम के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का विवरण नहीं मिला।

इसके बाद चारों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए। साथ ही एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने संबंधित चारों दाखिले भी रद्द कर दिए।

अब SIT तलाश रही है पूरी प्रक्रिया की कड़ी

जांच में SIT का मुख्य फोकस इस बात पर है कि एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिचय पत्र चार अलग-अलग अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में कैसे इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते और अन्य जानकारियों को लेकर सामने आए सवालों की भी जांच की जा रही है।

टीम आवेदन करने से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने, उसके सत्यापन और फिर MBBS दाखिले में इस्तेमाल किए जाने तक पूरी प्रक्रिया को जोड़कर देख रही है। फिलहाल किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तय नहीं की गई है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और बयानों के आधार पर ही जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी।

SIT ने सभी मूल दस्तावेज मांगे

SIT अध्यक्ष एवं एसपी देहात जया बलूनी के मुताबिक दोनों थानों में दर्ज मुकदमों से संबंधित मूल दस्तावेज और पहले की गई जांच से जुड़े रिकॉर्ड मंगाए गए हैं। टीम सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी और उपलब्ध बयानों के साथ उनका मिलान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मामले में जांच आगे बढ़ रही है और दस्तावेजों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत के बाद सामने आया था मामला

इस मामले की शिकायत प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने की थी। उन्होंने तीन सितंबर को चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर कुछ अभ्यर्थियों के नाम सामने रखे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डोमिसाइल और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए गए और फिर इनके आधार पर MBBS में दाखिला लिया गया।

जिला प्रशासन ने शिकायत के आधार पर दस्तावेजों की जांच कराई। शुरुआती जांच में चार अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अनियमितता सामने आने के बाद उनके प्रमाणपत्र निरस्त किए गए और दाखिले भी रद्द कर दिए गए। इसके बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए।

370 संदिग्ध लोगों की सूची भी सौंपी

प्रदीप बहुगुणा ने 18 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर एक और सूची सौंपी। उनके मुताबिक सूची में करीब 370 ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जिनके दस्तावेजों और सरकारी लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया पर उन्होंने संदेह जताया है।

उन्होंने इन मामलों की भी जांच कराने की मांग की है। अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र मामले में SIT की जांच के साथ इन आरोपों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर बनी हुई है।

निष्कर्ष

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला अब SIT की जांच के दायरे में है। टीम राजस्व रिकॉर्ड, मूल दस्तावेज, आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बयान जुटा रही है। जांच का अगला चरण यह स्पष्ट करेगा कि संदिग्ध प्रमाणपत्र तैयार होने से लेकर MBBS दाखिले तक की प्रक्रिया में वास्तविक गड़बड़ी कहां और किस स्तर पर हुई।

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