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उत्तराखंड के हर प्राथमिक विद्यालय में होगी बालवाटिका, खेल-खेल में सीखेंगे नौनिहाल; 5,585 स्कूलों में पहले से संचालन

देहरादून | 19 सितंबर 2026

देहरादून: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत उत्तराखंड में प्रारंभिक शिक्षा को अधिक रोचक और गतिविधि आधारित बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया गया है। राज्य के सभी 11,580 प्राथमिक विद्यालयों को बालवाटिका से जोड़ने की तैयारी चल रही है। वर्तमान में 5,585 विद्यालयों में बालवाटिका संचालित की जा रही है, जबकि बाकी विद्यालयों में इसकी शुरुआत के लिए शिक्षा विभाग ने मैपिंग का काम शुरू कर दिया है।

11,580 विद्यालयों तक पहुंचेगी बालवाटिका

शिक्षा विभाग का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में बालवाटिका संचालित करना है। इसके लिए उन विद्यालयों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां अभी तक प्री-प्राइमरी स्तर की बालवाटिका शुरू नहीं हुई है।

विभाग के अनुसार बालवाटिका के माध्यम से तीन से आठ वर्ष तक के बच्चों को पारंपरिक तरीके से पढ़ाने के बजाय खेल और विभिन्न गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर दिया जाएगा।

‘जादू का पिटारा’ से खेल-खेल में पढ़ाई

जिन विद्यालयों में अभी बालवाटिका शुरू नहीं हुई है, वहां ‘जादू का पिटारा’ और ‘ई-जादू का पिटारा’ जैसी शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों के लिए गतिविधियां संचालित करने की योजना है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों में भाषा, अभिव्यक्ति और शुरुआती संख्या ज्ञान की समझ विकसित करना है। खेल, कहानी, बातचीत और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

शिक्षकों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

बालवाटिका के संचालन के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जादू का पिटारा कार्यक्रम के जिला समन्वयक प्रणय बहुगुणा के मुताबिक सीएसईआरटी की ओर से अब तक करीब 200 प्राथमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बच्चों की विकासात्मक जरूरतों को समझने, खेल और गतिविधियों के जरिए पढ़ाने तथा भाषा विकास और बुनियादी संख्या ज्ञान से जुड़ी सामग्री तैयार करने की जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और कम लागत वाली सामग्री का इस्तेमाल कर शिक्षण-अधिगम सामग्री तैयार करने पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

देखकर, सुनकर और खेलकर सीखेंगे बच्चे

बालवाटिका की अवधारणा में बच्चों के अनुभव और उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को सीखने का आधार बनाया गया है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया जा रहा है कि बच्चे देखकर, सुनकर, छूकर, खेलकर, सवाल पूछकर और दूसरे बच्चों व शिक्षकों के साथ बातचीत करके अधिक प्रभावी तरीके से सीखते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए बाल केंद्रित और अनुभवात्मक अधिगम को दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

‘जादू का पिटारा’ के लिए विद्यालयों को मिलेगी धनराशि

शिक्षा विभाग के अनुसार समग्र शिक्षा के तहत प्राथमिक विद्यालयों को ‘जादू का पिटारा’ खरीदने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। इससे स्कूलों में प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों के लिए आवश्यक गतिविधि आधारित सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अनुसार राज्य के सभी प्राथमिक विद्यालयों को बालवाटिका से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। वर्तमान में करीब 50 प्रतिशत विद्यालयों में बालवाटिका संचालित हो रही है और शेष विद्यालयों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उत्तराखंड में बालवाटिका के विस्तार से प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई का तरीका अधिक गतिविधि और अनुभव आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है। 11,580 प्राथमिक विद्यालयों तक यह व्यवस्था पहुंचने के बाद छोटे बच्चों को पढ़ाई के शुरुआती दौर में खेल, संवाद और प्रयोग के माध्यम से सीखने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

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