देहरादून, 1 नवंबर 2026
सरकारी कार्यों में लापरवाही और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र पोषित योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहने और आवश्यक जानकारियां उपलब्ध नहीं कराने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डीएम ने इस पूरे मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए अधिकारी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
न बैठक में पहुंचे, न किसी प्रतिनिधि को किया नामित
मामला केंद्र सरकार की सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा बैठक का है। जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अपर सचिव की अध्यक्षता में केंद्र पोषित योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की जानी थी।
इस बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी को संबंधित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट और अन्य जरूरी सूचनाओं के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन निर्धारित बैठक में न तो जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल पहुंचे और न ही उनकी ओर से किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया।
डीएम कार्यालय की याद दिलाने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जिलाधिकारी के मुताबिक, समाज कल्याण विभाग को पहले ही पत्र के माध्यम से बैठक की जानकारी देते हुए जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने न तो मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराईं और न ही बैठक में विभाग की ओर से किसी की उपस्थिति सुनिश्चित की।
बताया गया है कि जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से भी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से निर्देश देकर याद दिलाया गया था कि सभी आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध कराई जाएं और विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी बैठक में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करे।
इसके बाद भी निर्देशों का पालन नहीं किया गया। अधिकारी की ओर से न तो कोई जानकारी भेजी गई और न ही इस संबंध में समय रहते कोई स्पष्टीकरण दिया गया।
नोटिस में अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
जिलाधिकारी आशीष चौहान ने इस लापरवाही को पदेन दायित्वों के निर्वहन में गंभीर चूक और सरकारी कार्यों के प्रति उदासीनता माना है। इसी आधार पर जिला समाज कल्याण अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उनके स्तर से निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन क्यों नहीं किया गया।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना लिखित जवाब देना होगा। यदि स्पष्टीकरण नहीं मिलता या दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
संभावित कार्रवाई में अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिम्मेदारी निर्धारित करना, वेतन आहरण पर प्रतिबंध और प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कार्रवाई शामिल है।
समाज कल्याण अधिकारी ने जवाब देने की कही बात
इस मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल से भी पक्ष लिया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में उनकी ओर से जवाब दे दिया गया है। अब प्रशासन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का परीक्षण किए जाने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
देहरादून जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी योजनाओं की समीक्षा और विभागीय जवाबदेही के प्रति सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि महत्वपूर्ण सरकारी बैठकों में अनुपस्थिति और निर्धारित सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने जैसी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब सबकी नजर अधिकारी की ओर से दिए गए जवाब और प्रशासन के अगले निर्णय पर है।


