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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कुलसचिव से मारपीट मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन कर्मचारी गिरफ्तार; न्यायालय ने भेजा जेल

स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 1 नवंबर 2026

हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में कुलसचिव सत्यदेव निगमालंकार के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में नामजद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार 31 अक्टूबर की सुबह विश्वविद्यालय परिसर में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब कुछ कर्मचारी कुलपति कार्यालय में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान कुलसचिव सत्यदेव निगमालंकार मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को अपने-अपने कार्यस्थलों पर जाने तथा परिसर में अव्यवस्था न फैलाने के लिए कहा। आरोप है कि उनकी इस बात से नाराज होकर कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

कुलसचिव की शिकायत के मुताबिक, रजनीश भारद्वाज, नरेंद्र मलिक, अरुण पाल, ओमवीर सिंह, उमाशंकर और सत्यदेव समेत अन्य लोगों ने उन पर हमला किया। आरोपियों ने लात-घूंसों और थप्पड़ों से पिटाई करने के साथ हाथ में पहने कड़े से भी वार किए। इस दौरान उनके पास मौजूद बैग भी छीन लिया गया, जिसमें विश्वविद्यालय से संबंधित कुछ चेक और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे।

कार्यालय में तोड़फोड़ और जरूरी दस्तावेज ले जाने का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावर जबरन कुलपति कार्यालय में दाखिल हो गए। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और कार्यालय में रखी डीवीआर भी उखाड़ ली गई। इसके अलावा कुछ गोपनीय फाइलें ले जाने और कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को जबरन बाहर निकालने का आरोप भी लगाया गया है।

कुलसचिव के अनुसार, आरोपियों ने कुलपति के कक्ष में प्रवेश करने की भी कोशिश की। विरोध करने पर कुलसचिव, कुलपति और अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्रता करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। मारपीट में सत्यदेव निगमालंकार को गंभीर चोटें आईं और वह बेहोश हो गए। इसके बाद प्रो. प्रभात कुमार और विश्वविद्यालय की कुलपति उन्हें लेकर कनखल थाने पहुंचे, जहां मामले की शिकायत दर्ज कराई गई।

हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा, तीन गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। कार्रवाई करते हुए नरेंद्र मलिक, ओमबीर सिंह और उमाशंकर को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपी विश्वविद्यालय के कर्मचारी बताए जा रहे हैं और परिसर में ही रहते हैं।

कनखल कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। एहतियात के तौर पर विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

15 दिनों से चल रहा था कर्मचारियों का आंदोलन

इस घटना के पीछे विश्वविद्यालय में पिछले कई दिनों से चल रहा कर्मचारी आंदोलन भी एक अहम पृष्ठभूमि माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। बाद में शिक्षेत्तर कर्मचारी संघ से जुड़े कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए थे।

करीब 15 दिनों तक चले इस आंदोलन का शुक्रवार रात आपसी समझौते के बाद समाप्त होने का दावा किया गया था। हालांकि, शनिवार सुबह एक बार फिर कर्मचारियों और कुलसचिव के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और मारपीट की घटना सामने आ गई।

कुलपति ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की कही थी बात

घटना के बाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता ने बताया था कि कुछ कर्मचारियों ने कुलसचिव के साथ मारपीट की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थीं। उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई जाएगी। घायल कुलसचिव को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाने की बात भी उन्होंने कही थी।

पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फिलहाल तीन आरोपी जेल में हैं और पुलिस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के बीच हुए विवाद, कार्यालय में तोड़फोड़ और महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने के आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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