स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
तिथि: 31 अक्टूबर 2026
देहरादून। उत्तराखंड में घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। अब पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर कनेक्शन लेने के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) और नेट मीटरिंग से जुड़ी कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने डिजिटल अनुबंध को कानूनी मान्यता प्रदान कर दी है। इससे सोलर कनेक्शन की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल और सुविधाजनक हो जाएगी।
नेशनल पोर्टल पर स्वीकार की गई शर्तें ही होंगी बाध्यकारी अनुबंध
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की याचिका पर यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पीएम सूर्य घर नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के दौरान उपभोक्ता की ओर से डिजिटल माध्यम से स्वीकार की जाने वाली शर्तों को ही उपभोक्ता और यूपीसीएल के बीच पूर्ण रूप से वैध पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) माना जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने इस व्यवस्था को मंजूरी दी है। इसके बाद उपभोक्ताओं को अलग से कागजी अनुबंध तैयार कराने या उस पर हस्ताक्षर के लिए बिजली उपखंड कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस फैसले से खासतौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी, जो अपने घरों में सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल में बचत करना चाहते हैं और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को देकर उसका लाभ लेना चाहते हैं।
मीटर टेस्टिंग के लिए आवेदन के समय नहीं देना होगा शुल्क
आयोग ने मीटर टेस्टिंग शुल्क को लेकर भी उपभोक्ताओं को राहत दी है। अब तक योजना के तहत सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 200 रुपये और थ्री-फेज कनेक्शन के लिए 300 रुपये मीटर टेस्टिंग शुल्क लिया जाता था।
नई व्यवस्था के अनुसार, यह राशि आवेदन के समय नकद या अग्रिम रूप से जमा नहीं करनी होगी। सोलर सिस्टम के ग्रिड से जुड़ने और उसके सुचारू रूप से चालू होने के बाद मीटर टेस्टिंग की निर्धारित रकम उपभोक्ता के सामान्य बिजली बिल में जोड़ दी जाएगी। इससे आवेदन के शुरुआती चरण में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
अतिरिक्त बिजली का भुगतान और बिल में मिलेगी पारदर्शिता
नियामक आयोग ने सोलर उपभोक्ताओं और ऊर्जा निगम के बीच बिजली के लेन-देन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि कोई उपभोक्ता अपनी जरूरत से अधिक बिजली पैदा करता है और ग्रिड को भेजी गई बिजली की मात्रा उसके कुल इस्तेमाल से ज्यादा होती है, तो यूपीसीएल नियमानुसार उस अतिरिक्त बिजली का भुगतान या समायोजन करेगा।
इसके अलावा, समय से पहले बिजली बिल जमा करने वाले सोलर उपभोक्ताओं को भी सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं की तरह नियमानुसार अर्ली पेमेंट छूट का लाभ मिलेगा।
बिजली की खपत और उत्पादन का सही हिसाब रखने के लिए उपभोक्ता के मौजूदा बिजली मीटर को चेक मीटर के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे बिजली के इस्तेमाल और ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त ऊर्जा की रीडिंग में पारदर्शिता बनी रहेगी।
प्रदेश के 88,459 घरों में स्थापित हो चुके हैं सोलर प्लांट
उत्तराखंड में पीएम सूर्य घर योजना को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत प्रदेश में अब तक कुल 1,35,052 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इनमें से 88,459 घरों की छतों पर सोलर प्लांट स्थापित कर उन्हें चालू किया जा चुका है। इन संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 318.90 मेगावाट बताई गई है।
डिजिटल अनुबंध को कानूनी मान्यता मिलने और कागजी प्रक्रिया आसान होने से उम्मीद है कि प्रदेश में अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आगे आएंगे।
सौर ऊर्जा अपनाने की राह होगी आसान
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का यह फैसला रूफटॉप सोलर योजना को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। ऑनलाइन एग्रीमेंट को कानूनी मान्यता मिलने से उपभोक्ताओं का समय बचेगा और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा। वहीं, मीटर शुल्क को बिजली बिल में जोड़ने और अतिरिक्त बिजली के भुगतान की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
कुल मिलाकर, नई व्यवस्था से प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना पहले से आसान होगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी गति मिलने की उम्मीद है।


