स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 31 अक्टूबर 2026
हरिद्वार: जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों और खेतों में पहुंचने वाले जंगली हाथियों पर अब वन विभाग तकनीक के जरिए नजर रखेगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभाग ने आबादी की ओर बार-बार आने वाले 18 हाथियों की पहचान की है। इनमें से छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे। खास बात यह है कि ये सभी हाथी अपने-अपने झुंड के नेतृत्वकर्ता यानी गैंग लीडर हैं। इनके जरिए पूरे झुंड की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
वन विभाग की योजना है कि कुंभ मेले से पहले सभी छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने का काम पूरा कर लिया जाए। इससे हाथियों की लोकेशन और उनके आने-जाने के रास्तों की जानकारी समय रहते मिल सकेगी। विभाग को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों की दस्तक से पहले ही लोगों को सतर्क किया जा सकेगा।
खेतों से लेकर रिहायशी इलाकों तक हाथियों की आवाजाही बनी चुनौती
हरिद्वार के श्यामपुर, जगजीतपुर, बिलकेश्वर, चिड़ियापुर, पथरी और जंगल से सटे अन्य इलाकों में जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। भोजन की तलाश में हाथियों के झुंड कई बार जंगल से निकलकर खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इस दौरान इंसानों और हाथियों का आमना-सामना होने से गंभीर हादसों का खतरा बना रहता है।
हाल के दिनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ समय पहले लालढांग क्षेत्र में खेत में काम कर रहे एक किसान को जंगली हाथी ने पटककर मार डाला था। वहीं, श्यामपुर में हाईवे पर एक राहगीर की गाड़ी पर भी हाथी ने हमला कर दिया था।
हाथियों की ऐसी घटनाओं में लोगों की जान जाने के साथ ही फसलों, मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचता है। दूसरी तरफ, इस संघर्ष में जंगली हाथियों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। ऐसे में वन विभाग के सामने इंसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों की टास्क फोर्स ने की 18 हाथियों की पहचान
इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने के लिए वन विभाग ने विशेषज्ञों की मदद से एक विशेष टास्क फोर्स गठित की है। प्रमुख वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।
टास्क फोर्स में वन विभाग के अधिकारियों के साथ भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के वैज्ञानिक और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं।
टीम ने हरिद्वार के अलग-अलग वन क्षेत्रों और आबादी से सटे इलाकों में कई दिनों तक अध्ययन किया। इसके बाद बार-बार रिहायशी क्षेत्रों की ओर आने वाले 18 हाथियों को चिह्नित किया गया। इनमें से छह ऐसे हाथियों का चयन किया गया है, जो अपने झुंड का नेतृत्व करते हैं।
इन छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने के लिए आवश्यक अनुमतियां भी प्राप्त हो चुकी हैं। अगले सप्ताह विशेष टीम के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। विभाग का लक्ष्य कुंभ मेले से पहले सभी चयनित हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाने का है।
रेडियो कॉलर से मिलेगी हाथियों की लोकेशन, समय रहते हो सकेगी कार्रवाई
रेडियो कॉलर लगने के बाद वन विभाग के लिए हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से हाथियों की लोकेशन और उनकी मूवमेंट की जानकारी मिल सकेगी।
इससे विभाग यह भी समझ पाएगा कि हाथियों के झुंड किन रास्तों का बार-बार इस्तेमाल करते हैं और कौन से इलाके उनके आवागमन के लिहाज से संवेदनशील हैं।
हालांकि, रेडियो कॉलर लगाने से हाथियों का आबादी में आना अपने आप बंद नहीं होगा। इसका वास्तविक फायदा तभी मिलेगा, जब प्राप्त लोकेशन के आधार पर वन विभाग की टीमें समय रहते सक्रिय होकर जरूरी कदम उठाएंगी।
रेडियो कॉलर के साथ सोलर फेंसिंग और एलीफैंट ट्रेंच पर भी काम
वन विभाग केवल रेडियो कॉलर तक ही अपनी तैयारी सीमित नहीं रख रहा है। जंगल और आबादी के बीच सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं।
इनमें प्रमुख रूप से:
जंगल से सटे संवेदनशील इलाकों में सोलर फेंसिंग लगाई जा रही है।
हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए एलीफैंट ट्रेंच तैयार किए जा रहे हैं।
वन क्षेत्रों में निगरानी के लिए वॉच टावर बनाए जा रहे हैं।
हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कर्मचारियों को हाथी मित्र के रूप में तैनात किया जाएगा।
हाथियों की लोकेशन और निगरानी से जुड़ी सूचनाओं के लिए कमांड कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य हाथियों के आबादी में प्रवेश की घटनाओं को कम करना और किसी भी संभावित खतरे पर तत्काल प्रतिक्रिया देना है।
क्या बोले अधिकारी?
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि वन विभाग की टास्क फोर्स ने आबादी की ओर आने वाले 18 हाथियों को चिह्नित किया है। इनमें से छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे। इसके लिए सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त हो चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह विशेष टीम दोबारा हरिद्वार पहुंचेगी और कुंभ मेले से पहले सभी छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए कमांड कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। सोलर फेंसिंग, एलीफैंट ट्रेंच और वॉच टावर बनाने का काम भी जारी है। जल्द ही हाथी मित्र के रूप में कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी।
निष्कर्ष
हरिद्वार में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष को देखते हुए वन विभाग की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। छह झुंड प्रमुख हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने से हाथियों के आवागमन और उनके पसंदीदा रास्तों की सटीक जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस योजना की सफलता निगरानी के साथ-साथ समय पर की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी। अब देखना होगा कि कुंभ मेले से पहले तैयार होने वाली यह व्यवस्था जंगल और आबादी के बीच बढ़ते टकराव को कम करने में कितनी प्रभावी साबित होती है।


