स्थान: हरिद्वार, उत्तराखंड
दिनांक: 7 नवंबर 2026
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में लगभग 55 साल के एक बुजुर्ग हाथी की उपचार के दौरान मौत हो गई। हाथी की तबीयत बिगड़ने के बाद वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने उसे बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत के पीछे बढ़ती उम्र से जुड़ी हृदय संबंधी समस्याओं की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों की निगरानी में किया गया था उपचार
वन विभाग के मुताबिक, 6 नवंबर को हाथी की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, WWF के विशेषज्ञों, अनुभवी वन्यजीव चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला था। विशेषज्ञों की निगरानी में हाथी को डार्ट किया गया, लेकिन इसके बाद उसकी हालत और बिगड़ गई।
स्थिति गंभीर होते देख टीम ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया। हाथी को ऑक्सीजन देने के साथ सीपीआर, रिवर्सल औषधि और नसों के माध्यम से तरल पदार्थ (IV फ्लूड) उपलब्ध कराया गया। चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन उपचार के दौरान हाथी ने दम तोड़ दिया।
पोस्टमार्टम में सामने आई हृदय संबंधी बीमारी
हाथी की मौत के बाद स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञ समिति ने पोस्टमार्टम किया। जांच में उसकी उम्र करीब 55 वर्ष आंकी गई। रिपोर्ट के अनुसार, हाथी के शरीर में अत्यधिक वृद्धावस्था से जुड़ी हृदय संबंधी समस्याएं मौजूद थीं।
पोस्टमार्टम में मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे बदलाव पाए गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन बीमारियों के कारण हाथी का हृदय कमजोर हो गया था और उसके लिए शारीरिक तनाव सहन करना मुश्किल हो रहा था।
उम्र और बीमारी ने बढ़ाई मुश्किलें
विशेषज्ञों के प्रयासों के बावजूद हाथी को नहीं बचाया जा सका। पोस्टमार्टम में सामने आए निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि अधिक उम्र के साथ विकसित हुई हृदय संबंधी बीमारियां उसकी बिगड़ती हालत की प्रमुख वजह थीं।
निष्कर्ष: हरिद्वार में एक बुजुर्ग हाथी की मौत से वन्यजीव संरक्षण और उम्रदराज वन्यजीवों की देखभाल से जुड़ी चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के चलते उसकी जान नहीं बच सकी।


